February 23, 2026

लापता स्वरूपों के मामले में एस.जी.पी.सी. का सरकार को सहयोग से इनकार

लापता स्वरूपों के मामले में एस.जी.पी.सी...

अमृतसर, 6 जनवरी : गुरु ग्रंथ साहिब जी के 328 पावन स्वरूपों के लापता होने के मामले को लेकर शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) और पंजाब सरकार के बीच विवाद और गहरा होता जा रहा है। एसजीपीसी ने साफ कर दिया है कि उसके लिए श्री अकाल तख्त साहिब का आदेश सर्वोपरि और अंतिम है। इसी कारण इस मामले में न तो पुलिस प्रशासन और न ही सरकार को कोई सहयोग दिया जाएगा, और न ही कोई रिकॉर्ड उपलब्ध कराया जाएगा।

अकाल तख्त साहिब का आदेश अंतिम: एसजीपीसी

यह फैसला सोमवार को अमृतसर में एसजीपीसी सचिव प्रताप सिंह की अगुवाई में हुई कमेटी अधिकारियों की अहम बैठक में लिया गया। बैठक के बाद सचिव प्रताप सिंह ने सिख संस्था का पक्ष स्पष्ट करते हुए कहा कि इस मामले में दोषी कर्मचारियों के खिलाफ श्री अकाल तख्त साहिब की जांच रिपोर्ट के अनुसार एसजीपीसी अपनी कार्रवाई पूरी कर चुकी है।एसजीपीसी सचिव ने कहा कि श्री अकाल तख्त साहिब का आदेश सिख संस्था के लिए अंतिम है और उसी के अनुसार सरकार को किसी भी तरह का सहयोग नहीं दिया जा सकता।

उन्होंने बताया कि पावन स्वरूपों की भेंट को निजी हितों के लिए इस्तेमाल करने और रिकॉर्ड में हेराफेरी करने के सीधे तौर पर दोषी तीन कर्मचारी—कंवलजीत सिंह, बाज सिंह और दलबीर सिंह पाए गए हैं।

नियमों की अनदेखी से बदनाम हुई संस्था

प्रताप सिंह ने कहा कि इन कर्मचारियों ने अपनी लालच के चलते शिरोमणि कमेटी के पूरे प्रबंधन को बदनाम किया। एसजीपीसी के नियमों के अनुसार जब श्रद्धालु या गुरुद्वारा कमेटियां पावन स्वरूपों की मांग करती हैं, तो प्रचारक की जांच रिपोर्ट और एसजीपीसी सदस्य की सिफारिश के बाद सचिव स्तर के अधिकारी द्वारा इसकी मंजूरी दी जाती है। इसके बाद भेंट जमा कर रसीद काटी जाती है और पूरा विवरण रिकॉर्ड में दर्ज किया जाता है।

सेवा नियमों के तहत कार्रवाई संस्था का अधिकार

उन्होंने कहा कि इस मामले में प्रकाशन विभाग में तैनात तत्कालीन कर्मचारियों ने अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाई। इसी कारण उन्हें सीधे तौर पर दोषी मानते हुए कार्रवाई की गई। इस प्रकरण के चलते कई वरिष्ठ अधिकारियों को भी प्रबंधकीय स्तर पर कार्रवाई का सामना करना पड़ा। एसजीपीसी सचिव ने कहा कि सिख संस्था सिख गुरुद्वारा एक्ट की भावना के अनुसार कार्य करती है और हर कर्मचारी की तय जिम्मेदारी होती है। यदि कोई कर्मचारी अपने कर्तव्य में लापरवाही करता है तो उसके खिलाफ सेवा नियमों के अनुसार विभागीय कार्रवाई करना संस्था का अधिकार है।

आप नेताओं के बयानों पर आपत्ति

बैठक के दौरान एसजीपीसी अधिकारियों ने पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार के नेताओं द्वारा दिए जा रहे बयानों को भी निराधार बताया। उन्होंने कहा कि इस तरह की बयानबाजी सिख संस्था को जानबूझकर बदनाम करने की कोशिश है।

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