रूपनगर, 15 फरवरी : साल 2018 से चली आ रही परंपरा को तोड़ते हुए शिरोमणि अकाली दल (पुनर सुरजीत) ने इस बार श्री आनंदपुर साहिब में होला-मोहल्ला के दौरान राजनीतिक सम्मेलन करने का फैसला किया है। पार्टी के प्रवक्ता प्रेम सिंह चंदूमाजरा ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि अकाली दल (बादल) से अलग हुए इस धड़े ने तीन दिवसीय धार्मिक समागम के दौरान रैली आयोजित करने की योजना बनाई है। इसके लिए आनंदपुर साहिब-कीरतपुर साहिब मुख्य मार्ग पर स्थान भी तय कर लिया गया है।
2018 से बंद थीं राजनीतिक रैलियां
गौरतलब है कि वर्ष 2018 में सिख जत्थेदारों ने राजनीतिक दलों से अपील की थी कि पवित्र पर्व के दौरान एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप और राजनीतिक हमलों से बचा जाए। इसके बाद से पंजाब की प्रमुख पार्टियों ने यहां सियासी रैलियां करना बंद कर दिया था। हालांकि, चंदूमाजरा का कहना है कि जत्थेदारों ने केवल निजी आरोपों से परहेज की बात कही थी, राजनीतिक सम्मेलन पर कोई औपचारिक रोक नहीं लगाई गई थी।
“होला-मोहल्ला का इतिहास सिख सियासत से जुड़ा”
पार्टी का तर्क है कि होला-मोहल्ला की परंपरा स्वयं सिख इतिहास और पंथक राजनीति से जुड़ी रही है। ऐसे में सामाजिक और पंथक मुद्दों पर विचार रखना परंपरा के विरुद्ध नहीं है।अब तक आम आदमी पार्टी, कांग्रेस या अकाली दल (बादल) की ओर से ऐसी किसी रैली की घोषणा नहीं की गई है।
27 फरवरी से 3 मार्च तक होगा आयोजन
इस वर्ष होला-मोहल्ला 27 फरवरी से 3 मार्च तक मनाया जाएगा, जिसमें लाखों श्रद्धालु श्री आनंदपुर साहिब पहुंचते हैं। दशकों से राजनीतिक दल इस विशाल संगत का उपयोग पंथक और राज्य से जुड़े मुद्दों पर अपना एजेंडा साझा करने के लिए करते रहे हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि अकाली दल (पुनर सुरजीत) के इस फैसले के बाद अन्य दल भी अपना रुख बदलते हैं या परंपरा को कायम रखते हैं।
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