अमृतसर, 6 अप्रैल : शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) द्वारा सोमवार को बेअदबी के खिलाफ बनाए जा रहे कानून को लेकर एक अहम बैठक आयोजित की गई, जिसमें विभिन्न सिख जत्थेबंदियों ने भाग लिया। बैठक में सभी संगठनों ने इस मुद्दे पर एकजुटता दिखाते हुए सरकार से पंथक भावनाओं का सम्मान करने की अपील की।
एसजीपीसी अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी ने कहा कि इस पंथक एकत्रता का उद्देश्य किसी बिल का विरोध करना या राजनीतिक लाभ लेना नहीं, बल्कि इसका उचित समाधान खोजना है। उन्होंने मांग की कि पंजाब सरकार 13 अप्रैल से पहले प्रस्तावित कानून का ड्राफ्ट एसजीपीसी को भेजे, ताकि उस पर विस्तृत विचार-विमर्श किया जा सके।
सिख संस्थाओं की राय जरूरी: जत्थेबंदियां
बैठक में मौजूद वक्ताओं ने कहा कि सिख मामलों से जुड़े किसी भी कानून को बनाने से पहले सिख संस्थाओं और जत्थेबंदियों की राय लेना बेहद जरूरी है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सरकार बिना परामर्श के कानून बनाएगी, तो वह अधूरा और प्रभावहीन साबित हो सकता है।
वक्ताओं ने कहा कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी के मामलों को रोकने के लिए सख्त सजा का प्रावधान होना चाहिए, लेकिन कानून पूरी स्पष्टता के साथ बनाया जाना जरूरी है, ताकि उसके दुरुपयोग की संभावना न रहे।
बेअदबी की घटनाओं पर भी उठे सवाल
बैठक में इस बात पर भी जोर दिया गया कि सिर्फ सजा तय करना ही काफी नहीं है, बल्कि यह समझना भी जरूरी है कि बेअदबी की घटनाएं क्यों हो रही हैं और सरकारें इस मुद्दे पर गंभीरता क्यों नहीं दिखा रही हैं। बैठक के अंत में हरजिंदर सिंह धामी द्वारा पेश किए गए विशेष प्रस्ताव को सर्वसम्मति से मंजूरी दी गई। इस प्रस्ताव में स्पष्ट किया गया कि सिखों के लिए श्री गुरु ग्रंथ साहिब केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवंत गुरु का स्वरूप हैं, जिनकी मर्यादा और सम्मान सर्वोच्च है।
सिख संगठनों ने दोहराया कि बेअदबी के मामलों को रोकना बेहद जरूरी है, लेकिन इसके लिए बनाया जाने वाला कानून सिख विचारधारा और पंथक सहमति के अनुरूप होना चाहिए। इस मुद्दे पर पहले भी विभिन्न सरकारों ने प्रयास किए, लेकिन अब तक कोई ठोस और प्रभावी समाधान सामने नहीं आ पाया है।

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