नई दिल्ली, 11 मार्च : सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को बंबई हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ केंद्र सरकार की याचिका पर सुनवाई करने के लिए सहमति दे दी। हाई कोर्ट ने इंटरनेट मीडिया पर सरकार के खिलाफ फर्जी और भ्रामक कंटेंट को नियंत्रित करने के उद्देश्य से सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) नियमों में वर्ष 2023 में किए गए संशोधनों को रद्द कर दिया था और उन्हें असंवैधानिक करार दिया था।
हालांकि, सर्वोच्च अदालत ने 2024 में आए हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। साथ ही अदालत ने इंटरनेट मीडिया प्लेटफॉर्मों की मौजूदा स्थिति पर गंभीर चिंता भी जताई।
मूल याचिकाकर्ताओं को नोटिस जारी
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति आर. महादेवन और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने स्टैंडअप कॉमेडियन कुणाल कामरा, एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया और एसोसिएशन ऑफ इंडियन मैगजीन सहित मूल याचिकाकर्ताओं को नोटिस जारी किए। बता दें कि बंबई हाई कोर्ट ने 26 सितंबर 2024 को संशोधित आईटी नियमों को रद्द कर दिया था।
केंद्र सरकार ने फैसले पर रोक की मांग की
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगाने की मांग की। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य किसी भी कंटेंट को पूरी तरह ब्लॉक करना नहीं है, बल्कि गलत और भ्रामक जानकारी को नियंत्रित करना है।
अदालत ने फर्जी संदेशों पर जताई चिंता
मुख्य न्यायाधीश ने भारतीय सेना और राष्ट्रीय नीतियों से जुड़े फर्जी संदेशों का जिक्र करते हुए कहा कि आजकल कुछ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जिस तरह से काम कर रहे हैं, वह बेहद खतरनाक है। उन्होंने कहा कि रिकॉर्ड में दी गई उदाहरणों को देखने से स्पष्ट होता है कि कुछ प्लेटफॉर्म कितने जोखिम भरे तरीके से संचालित हो रहे हैं। सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी सवाल उठाया कि क्या मौजूदा व्यवस्था में इंटरमीडियरी पर पर्याप्त जिम्मेदारी तय किए बिना पूरा बोझ सरकारी तंत्र पर डाल दिया गया है।
24 घंटे में कंटेंट हटाने का प्रावधान पहले से
एक पक्ष के वकील अरविंद दातार ने कहा कि मौजूदा नियम पहले से ही 24 घंटे के भीतर आपत्तिजनक कंटेंट हटाने की अनुमति देते हैं। उनके अनुसार 2023 का संशोधन गलत था, क्योंकि उसमें “भ्रामक जानकारी” की स्पष्ट परिभाषा नहीं दी गई थी।

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