पटियाला, 3 नवम्बर : पंजाब में पराली जलाने की घटनाओं में बढ़ोतरी के साथ ही शहरों की हवा भी प्रदूषित हो गई है। हालात ये हो गए हैं कि राज्य के कई जिले सुबह के समय धुएं से घिरे रहते हैं। लोगों को सांस लेने में दिक्कत हो रही है और उनकी आंखों में जलन हो रही है।
पराली के धुएं के कारण रविवार को मंडी गोबिंदगढ़ में अधिकतम वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 464 तक पहुंच गया, जबकि पटियाला में यह 414 रहा। इसे खतरनाक माना जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि 400 से ऊपर AQI में सांस लेना एक दिन में आठ सिगरेट पीने के बराबर है, जो एक स्वस्थ व्यक्ति को भी बीमार कर सकता है।
उपरोक्त दो जिलों के अलावा, अन्य जिलों में भी स्थिति बिगड़ती जा रही है। रविवार को जालंधर में अधिकतम एक्यूआई 319 दर्ज किया गया, जो बेहद खराब श्रेणी में आता है। लुधियाना में अधिकतम एक्यूआई 222 और अमृतसर में 201 दर्ज किया गया, जो खराब श्रेणी में आता है।
रविवार को पराली जलाने के मामलों में कमी आई
शनिवार को राज्य में पराली जलाने के 442 मामले सामने आए, जो इस साल अब तक की सबसे ज़्यादा घटनाएँ हैं। हालाँकि, रविवार को राज्य में पराली जलाने की सिर्फ़ 178 घटनाएँ ही दर्ज की गईं। इनमें से सबसे ज़्यादा 29 मामले फिरोजपुर में, 21 तरनतारन में और 20 मुक्तसर में दर्ज किए गए। इस सीज़न में अब तक राज्य में पराली जलाने की कुल 2,262 घटनाएँ दर्ज की गई हैं, जो पिछले साल इसी अवधि के दौरान हुई 3,916 घटनाओं की तुलना में लगभग 43 प्रतिशत कम है।
कार्रवाई भी तेज कर दी गई है
पराली जलाने के मामले में अब तक राज्य में 545 एफआईआर दर्ज की गई हैं और 555 रेड एंट्री भी दर्ज की गई हैं। पराली जलाने वालों पर कुल 40 लाख 55 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है और उनसे कुल 20 लाख 40 हजार रुपये वसूले गए हैं। तरनतारन में सबसे ज्यादा 114 एफआईआर दर्ज की गई हैं, जबकि अमृतसर 78 एफआईआर के साथ दूसरे स्थान पर है। इसी तरह, संगरूर में 56, फिरोजपुर में 54 और पटियाला में 52 एफआईआर दर्ज की गई हैं।
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