March 14, 2026

गंगा किनारों पर अवैध कब्जों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, मांगी विस्तृत रिपोर्ट

गंगा किनारों पर अवैध कब्जों पर सुप्रीम कोर्ट ...

नई दिल्ली, 14 मार्च : गंगा नदी के किनारों पर बड़े पैमाने पर हुए अवैध कब्जों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर चिंता जताई है। अदालत ने नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा अथॉरिटी (NMCGA) को निर्देश दिया है कि वह विभिन्न राज्यों में गंगा के तटों और उसके निकास क्षेत्र में हुए कब्जों की मौजूदा स्थिति पर एक विस्तृत और व्यापक रिपोर्ट पेश करे। सुप्रीम कोर्ट की पीठ, जिसमें जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन शामिल हैं, ने कहा कि गंगा के किनारों पर बड़े स्तर पर हुए अवैध कब्जों की स्थिति चिंताजनक है। अदालत ने सभी संबंधित राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को नोटिस जारी करते हुए मामले की अगली सुनवाई 23 अप्रैल 2026 तय की है।

कई राज्यों में सामने आए कब्जों के मामले

कोर्ट के सामने वर्ष 2024 में NMCGA द्वारा दाखिल हलफनामे में बताया गया था कि उत्तराखंड, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ में गंगा नदी के किनारों और आसपास के क्षेत्रों में अवैध कब्जों के मामले सामने आए हैं।

गौरतलब है कि गंगा नदी उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल से होकर गुजरती है, जबकि इसका निकास क्षेत्र (बेसिन) हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ सहित कई अन्य राज्यों तक फैला हुआ है।

दो साल पुराने हलफनामे पर कोर्ट ने मांगी ताजा रिपोर्ट

सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी नोट किया कि अथॉरिटी का हलफनामा लगभग दो वर्ष पुराना है। इस कारण सुप्रीम कोर्ट ने सभी संबंधित राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में गंगा के तटों पर कब्जों की मौजूदा स्थिति की ताजा रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने यह भी पूछा है कि पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के तहत जल संसाधन, नदी विकास और गंगा पुनरुत्थान मंत्रालय द्वारा 7 अक्टूबर 2016 को जारी अधिसूचना के प्रावधानों को लागू करने के लिए अब तक क्या-क्या कदम उठाए गए हैं।

याचिकाकर्ता की ओर से उठाया गया मुद्दा

याचिकाकर्ता अशोक कुमार सिन्हा की ओर से अधिवक्ता आकाश वशिष्ठ ने अदालत को बताया कि गंगा के किनारों पर बड़े पैमाने पर अवैध कब्जे किए गए हैं और इस मुद्दे पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है।

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