March 29, 2026

आवारा कुत्तों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, राज्यों को चेतावनी

आवारा कुत्तों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त...

नई दिल्ली, 29 जनवरी : सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों से जुड़ी व्यवस्थाओं में खामियों को लेकर कड़ी नाराज़गी जताई है। अदालत ने शेल्टर हाउस निर्माण, टीकाकरण और नसबंदी की क्षमता बढ़ाने, साथ ही अस्पतालों, स्कूलों, बस अड्डों जैसे सार्वजनिक स्थलों के आसपास से आवारा कुत्तों को हटाने के आदेशों का पूरी तरह पालन न होने पर असंतोष व्यक्त किया है। इसके साथ ही अस्पष्ट हलफनामे दाखिल करने पर भी कोर्ट ने राज्यों को फटकार लगाई है।

हलफनामों से असंतुष्ट सुप्रीम कोर्ट

जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की पीठ ने कहा कि राज्यों के बयान “हवाई” हैं और इस तरह की अस्पष्टता स्वीकार्य नहीं है। कोर्ट ने चेतावनी दी कि अगर आदेशों का सही ढंग से पालन नहीं हुआ तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। मामले की सुनवाई के दौरान न्यायमित्र गौरव अग्रवाल ने राज्यों द्वारा दाखिल हलफनामों का विवरण रखते हुए कई कमियों की ओर इशारा किया।

उन्होंने कहा कि कुछ कदम जरूर उठाए गए हैं, लेकिन अभी लंबा रास्ता तय करना बाकी है। उन्होंने जोर दिया कि पशु जन्म नियंत्रण (ABC) केंद्रों की संख्या बढ़ानी होगी, नसबंदी की रफ्तार तेज करनी होगी, शेल्टर स्थापित करने होंगे और संस्थागत परिसरों की बाड़बंदी जरूरी है ताकि वहां आवारा कुत्तों की आवाजाही रोकी जा सके। साथ ही राष्ट्रीय राजमार्गों से भी आवारा पशुओं को हटाना होगा।

बिहार के हलफनामे पर सवाल

न्यायमित्र ने बिहार का हवाला देते हुए बताया कि राज्य में 34 एबीसी केंद्र हैं, जहां 20,648 कुत्तों की नसबंदी की गई है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया गया कि प्रतिदिन कितने कुत्तों की नसबंदी की जा सकती है। उन्होंने कहा कि एबीसी केंद्रों का पूरा ऑडिट होना चाहिए। बिहार सरकार की ओर से पेश वकील मनीष कुमार ने कहा कि राज्य इस दिशा में काम कर रहा है और तीन महीनों में उल्लेखनीय प्रगति होगी। इस पर कोर्ट ने टिप्पणी की कि ये सिर्फ हवाई बातें हैं।

कुत्तों के काटने के मामलों पर चिंता

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि असम को छोड़कर किसी भी राज्य ने कुत्तों के काटने की घटनाओं का विस्तृत ब्योरा नहीं दिया। असम द्वारा पेश आंकड़ों पर कोर्ट ने गंभीर चिंता जताई।
कोर्ट ने बताया कि 2024 में असम में कुत्तों के काटने की 1.66 लाख घटनाएं हुईं और 2025 में सिर्फ जनवरी महीने में ही 20,900 मामले सामने आए, जो बेहद भयावह हैं।

अस्पष्ट बयान देने वालों पर सख्ती

जस्टिस विक्रम नाथ ने साफ कहा कि राज्य सरकारें हलफनामों में अस्पष्ट बयान नहीं दे सकतीं। कोर्ट ने चेतावनी दी कि ऐसे राज्यों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। अदालत ने गोवा, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, दिल्ली, झारखंड और गुजरात की दलीलें सुनने के बाद पाया कि कई संस्थागत परिसरों ने बाड़बंदी के आदेशों का पालन नहीं किया है।

कोर्ट ने कहा कि हर सार्वजनिक भवन की बाड़बंदी होनी चाहिए न सिर्फ आवारा कुत्तों और पशुओं से बचाव के लिए, बल्कि संपत्ति को चोरी से सुरक्षित रखने के लिए भी। न्यायमित्र गौरव अग्रवाल ने बताया कि गुरुवार को पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और तेलंगाना द्वारा उठाए गए कदमों पर चर्चा की जाएगी।

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