फरीदकोट, 3 मार्च : भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ. राजकुमार वेरका ने फरीदकोट पहुंचकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ बैठक की और पत्रकारों को संबोधित करते हुए केंद्र सरकार की नीतियों पर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार अंतरराष्ट्रीय “व्यापारिक समझौतों” के नाम पर देश के आर्थिक और कृषि हितों से समझौता कर रही है। साथ ही मनरेगा जैसी जनकल्याणकारी योजनाओं को कमजोर किया जा रहा है।
“राष्ट्रीय हितों को गिरवी रखा जा रहा”
डॉ. वेरका ने कहा कि यह समझौते देश की संप्रभुता और आत्मनिर्भरता के खिलाफ हैं। 1.44 अरब भारतीयों के हितों को किसी भी अंतरराष्ट्रीय दबाव में कुर्बान नहीं किया जा सकता। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2024 में भारत के पास 38 अरब डॉलर का व्यापार अधिशेष था, लेकिन अब 100 अरब डॉलर की वार्षिक अमेरिकी खरीद की शर्तें थोपना व्यापार नहीं बल्कि आर्थिक दबाव है।
मनरेगा पर भी उठाए सवाल
डॉ. वेरका ने कहा कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) पिछले दो दशकों से ग्रामीण गरीबों के लिए जीवनरेखा साबित हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि बजट में कटौती, मजदूरी भुगतान में देरी और ऐप-आधारित उपस्थिति प्रणाली जैसी तकनीकी बाधाओं के कारण गरीब मजदूरों को काम से वंचित किया जा रहा है। 15 दिनों के भीतर रोजगार देने के कानूनी प्रावधान की भी अनदेखी की जा रही है।
कांग्रेस की मुख्य मांगें
डॉ. वेरका ने पार्टी की मांगों को स्पष्ट करते हुए कहा:
- व्यापार समझौतों को संसद में लाकर पारदर्शी चर्चा कराई जाए।
- किसानों, मजदूरों और छोटे उद्योगों के हितों की रक्षा सुनिश्चित की जाए।
- मनरेगा का बजट बढ़ाकर समय पर मजदूरी भुगतान सुनिश्चित किया जाए।
- राष्ट्रीय संप्रभुता और आत्मनिर्भर भारत से कोई समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी किसानों, मजदूरों और आम नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए सड़क से संसद तक संघर्ष करेगी।
यह भी देखें : शिरोमणि अकाली दल के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने जताई चिंता

More Stories
खामेनेई की मौत पर बिना अनुमति निकाला गया शोक मार्च, 150 लोगों पर FIR
लॉरेंस बिश्नोई से जुड़े वकील पर फायरिंग का मुख्य आरोपी गिरफ्तार
2030 तक भारत-कनाडा व्यापार 50 अरब डॉलर पहुंचाने का लक्ष्य