चंडीगढ़, 1 जनवरी : पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने बुधवार को केंद्र की भाजपा सरकार पर तीखा हमला करते हुए आरोप लगाया कि मनरेगा (MGNREGA) में सुधार के नाम पर केंद्र सरकार गरीब-विरोधी एजेंडा थोपने की कोशिश कर रही है। हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि प्रस्तावित VB-G RAM G एक्ट वास्तव में गरीबों से उनके रोज़गार के अधिकार छीनने की साजिश है। उन्होंने दावा किया कि मनरेगा के तहत 23,000 करोड़ रुपये से अधिक का बकाया केंद्र सरकार के सुधारों के दावों की सच्चाई उजागर करता है।
पंजाब विधानसभा ने किया विरोध
वित्त मंत्री का यह बयान उस दिन के बाद आया है, जब पंजाब विधानसभा ने इस बिल के खिलाफ सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया। चीमा ने कहा कि केंद्र सरकार ने वित्तीय बोझ का 40 प्रतिशत हिस्सा राज्यों पर डालकर और योजना के बुनियादी ढांचे को कमजोर कर रोजगार की गारंटी को खत्म कर दिया है। चीमा ने इस कदम को भारत के संघीय ढांचे पर सीधा हमला करार देते हुए कहा कि भाजपा सरकार राज्यों के अधिकारों को कमजोर कर रही है।
हजारों करोड़ रुपये का भुगतान रोका
उन्होंने भाजपा नेतृत्व पर भ्रामक दावे करने का आरोप लगाते हुए कहा कि संसदीय समिति ने न तो योजना का नाम बदलने और न ही रोजगार पर कोई पाबंदी लगाने की सिफारिश की थी। समिति ने तो रुके हुए फंड को तुरंत जारी करने की बात कही थी। वित्त मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार ने 12,219 करोड़ रुपये मजदूरों की मजदूरी और 11,227 करोड़ रुपये पंचायतों के विकास कार्यों के लिए दबाकर रखे हैं।
डिजिटल शर्तों की कड़ी आलोचना
चीमा ने मोबाइल लोकेशन आधारित हाजिरी जैसी शर्तों की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि ऐसी शर्तें उन गरीब मजदूरों को योजना से बाहर करने के लिए हैं, जिनके पास महंगे मोबाइल फोन और इंटरनेट की सुविधा नहीं है। इस दौरान उन्होंने कांग्रेस पर भी निशाना साधते हुए कहा कि जहां पंजाब सरकार ने विधानसभा में प्रस्ताव पारित कर साहस दिखाया है, वहीं कांग्रेस शासित राज्य इस गंभीर मुद्दे पर चुप क्यों हैं?
हरपाल सिंह चीमा ने स्पष्ट किया कि पंजाब सरकार गरीबों के हक की लड़ाई मजबूती से लड़ती रहेगी और मनरेगा को कमजोर करने की किसी भी कोशिश का विरोध किया जाएगा।
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