चंडीगढ़, 31 जनवरी : पंजाब के करीब 19,000 सरकारी स्कूलों की इमारतों को अब नीले और पीले रंग की नई परत से सजाया जा रहा है। इस फैसले को लेकर प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि सत्ताधारी आम आदमी पार्टी (आप) शिक्षा व्यवस्था का राजनीतिकरण कर रही है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि स्कूलों की बाहरी दीवारों के लिए चुने गए रंग, आम आदमी पार्टी के झंडों, पोस्टरों और बैनरों में इस्तेमाल होने वाले रंगों से मेल खाते हैं। पार्टी का आरोप है कि यह कदम बच्चों और शिक्षण संस्थानों को राजनीतिक रंग देने की कोशिश है।
आरोप बेबुनियाद : शिक्षा मंत्री हरजोत बैंस
विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने कहा कि रंगों का चयन किसी भी तरह से पार्टी के रंगों से जुड़ा नहीं है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यह फैसला शिक्षकों और विशेषज्ञों की फीडबैक के आधार पर लिया गया है। बैंस ने कहा, “स्मार्ट स्कूलों और अन्य श्रेणियों के स्कूलों के लिए अलग-अलग रंग योजनाएं तय की गई हैं।
हाल ही में शिक्षा विभाग ने 852 सरकारी स्कूलों की मरम्मत के लिए 17.44 करोड़ रुपये जारी किए हैं।” शिक्षा विभाग के सूत्रों के अनुसार, विवाद इसलिए भी पैदा हुआ क्योंकि पंजाब में पहली बार स्कूलों के लिए एक समान कलर कोड लागू किया जा रहा है। सूत्रों ने यह भी दावा किया कि ओडिशा, झारखंड और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में भी स्कूलों की इमारतों को वहां की सत्ताधारी पार्टियों से जुड़े रंगों के समान रंगों में रंगा गया है।
पूर्व शिक्षा मंत्री परगट सिंह का तीखा हमला
इससे पहले स्कूल मैनेजमेंट कमेटियों से बजट पास होने के बाद स्कूल प्रमुखों को रंगों के चयन का अधिकार होता था, लेकिन अब यह निर्णय राज्य स्तर पर तय कलर कोड के तहत लिया गया है। पूर्व शिक्षा मंत्री और जालंधर कैंट से विधायक परगट सिंह ने इस फैसले की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि यह कदम सत्ताधारी पार्टी के राजनीतिक एजेंडे का हिस्सा है।
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