नई दिल्ली, 11 जनवरी : ईरान में देशव्यापी प्रदर्शन पर की गई कड़ी कार्रवाई में अब तक कम से कम 544 लोग मारे जा चुके हैं। प्रदर्शनकारियों के अनुसार, मरने वालों की संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है। दूसरी ओर, तेहरान ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा के लिए बल का इस्तेमाल करता है, तो अमेरिकी सेना और इजराइल “जायज निशाने” होंगे।
अमेरिकी और इजराइली सुरक्षा बलों पर ईरान का कड़ा रुख
ईरान ने अमेरिका और इजराइल को चेतावनी दी है कि अगर उनकी ओर से ईरान के अंदर के मामलों में हस्तक्षेप किया गया, तो उन्हें गंभीर परिणामों का सामना करना होगा। ईरान के अधिकारियों के अनुसार, यदि यह देश की संप्रभुता में दखलअंदाजी के रूप में सामने आता है, तो उचित कार्रवाई की जाएगी।
अमेरिका स्थित ‘ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट न्यूज एजेंसी’ के मुताबिक, पिछले दो हफ्तों में प्रदर्शन के दौरान 10,600 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया है। मृतकों में 496 प्रदर्शनकारी और 48 सुरक्षा बलों के जवान शामिल हैं। इस दौरान ईरान में इंटरनेट और फोन सेवाओं को पूरी तरह से बंद कर दिया गया है, जिससे बाहर से घटनाओं का सही अनुमान लगाना मुश्किल हो गया है।
अमेरिका का संभावित साइबर हमला और सैन्य प्रतिक्रिया पर विचार
इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और उनकी राष्ट्रीय सुरक्षा टीम ईरान के खिलाफ साइबर हमलों और सीधे सैन्य कार्रवाई पर विचार कर रहे हैं। ट्रम्प ने यह भी कहा कि यदि ईरान की तरफ से कोई आक्रामक कदम उठाया जाता है, तो अमेरिका ऐसी कार्रवाई करेगा, जो पहले कभी नहीं देखी गई।
ईरान में ये विरोध प्रदर्शन एक ऐसी घटनाक्रम का हिस्सा हैं, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान खींच लिया है। मानवाधिकार संगठनों ने इन प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा और नागरिक अधिकारों की उल्लंघन पर गहरी चिंता जताई है, जबकि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से ईरान पर दबाव बनाने की अपील की गई है।

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