January 17, 2026

ईडी ने अल फलाह यूनिवर्सिटी की 140 करोड़ रुपये की संपत्ति की कुर्की

ईडी ने अल फलाह यूनिवर्सिटी की...

नई दिल्ली, 17 जनवरी : प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शुक्रवार को हरियाणा स्थित अल फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़ी करीब 140 करोड़ रुपये की संपत्ति को कुर्क कर लिया। यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA) के तहत की गई है। 10 नवंबर को लाल किला क्षेत्र में हुए धमाके के बाद यह यूनिवर्सिटी सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर आ गई थी।

ईडी ने फरीदाबाद के धौज क्षेत्र में स्थित अल फलाह यूनिवर्सिटी की लगभग 54 एकड़ जमीन, यूनिवर्सिटी भवन, विभिन्न स्कूलों व विभागों की इमारतें और हॉस्टल को अस्थायी कुर्की आदेश के तहत जब्त किया है। एजेंसी ने इन संपत्तियों को “अपराध की कमाई” करार दिया है।

ट्रस्ट और चेयरमैन के खिलाफ चार्जशीट

अल फलाह ग्रुप के चेयरमैन जावेद अहमद सिद्दीकी और उनके ट्रस्ट के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई है। अधिकारियों के अनुसार, सिद्दीकी को नवंबर में ईडी ने छात्रों से धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों में गिरफ्तार किया था। एजेंसी का दावा है कि ट्रस्ट द्वारा संचालित कई शैक्षणिक संस्थानों के पास आवश्यक मान्यताएं नहीं थीं।

ईडी ने एक विशेष पीएमएलए अदालत में सिद्दीकी और अल फलाह ट्रस्ट के खिलाफ अभियोजन चलाने की मांग की है। दोनों को आरोपी बनाया गया है और मनी लॉन्ड्रिंग विरोधी कानून के तहत सख्त कार्रवाई की सिफारिश की गई है।

‘व्हाइट-कॉलर’ आतंकी मॉड्यूल से जुड़ाव की जांच

यूनिवर्सिटी की भूमिका एक कथित “व्हाइट-कॉलर” आतंकी मॉड्यूल की जांच के दौरान सामने आई। इस मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) और जम्मू-कश्मीर पुलिस ने तीन डॉक्टरों सहित 10 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया है। मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर उमर-उन-नबी पर 10 नवंबर को लाल किला के बाहर विस्फोटकों से भरी कार चलाने और आतंकी हमले की साजिश का मास्टरमाइंड होने का आरोप है। इस हमले में 15 लोगों की मौत हुई थी।

अधिकारियों ने बताया कि अस्थायी कुर्की को अंतिम रूप दिए जाने के बाद यूनिवर्सिटी कैंपस का प्रशासन सरकार द्वारा नियुक्त रिसीवर को सौंपा जा सकता है। इससे छात्रों की पढ़ाई प्रभावित नहीं होगी, जबकि आपराधिक जांच और मुकदमा जारी रहेगा।

415 करोड़ रुपये की ‘अपराध की कमाई’ का दावा

ईडी ने अदालत में बताया कि यूनिवर्सिटी और उसके गवर्निंग ट्रस्ट ने सिद्दीकी के निर्देश पर छात्रों और अभिभावकों से मान्यता के झूठे दावों के आधार पर पैसे वसूले और कम से कम 415.10 करोड़ रुपये की “अपराध की कमाई” अर्जित की।

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