अमृतसर, 7 जनवरी : सच्चखंड श्री हरिमंदर साहिब में 125 वर्ष पुरानी ऐतिहासिक घड़ी को पूरे सम्मान और मर्यादा के साथ दोबारा उसी स्थान पर स्थापित कर दिया गया है, जहां यह पहले सुशोभित रहती थी। इस विरासती घड़ी की वापसी के साथ ही श्रद्धालुओं को एक बार फिर इतिहास से जुड़ने का अवसर मिला है।
यह घड़ी रागी सिंहों वाली परिक्रमा के ऊपर स्थित है। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) के अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी के निर्देशों के तहत घड़ी को विधिवत रूप से पुनः स्थापित किया गया। खास बात यह रही कि घड़ी को उसके मूल स्वरूप में ही बहाल किया गया है, ताकि इसकी ऐतिहासिक पहचान और गरिमा बनी रहे।
इस विरासती घड़ी की एक अनोखी विशेषता यह है कि एक बार चाबी देने पर यह लगभग एक सप्ताह तक लगातार चलती रहती है। यह इसकी उत्कृष्ट कारीगरी और तकनीकी गुणवत्ता को दर्शाता है। लंबे समय तक खराब अवस्था में रहने के बाद अब यह घड़ी पूरी तरह सुचारु रूप से कार्य कर रही है।
उसी ऐतिहासिक स्थान पर हुई पुनः स्थापना
इतिहास के पन्नों में झांकें तो वर्ष 1900 में भारत के तत्कालीन वायसराय और गवर्नर जनरल लॉर्ड कर्जन ने श्री हरिमंदर साहिब के दर्शन के दौरान ‘प्लीकेट एंड कंपनी’ द्वारा निर्मित यह विशेष घड़ी भेंट की थी। अपने ऐतिहासिक और तकनीकी महत्व के कारण यह घड़ी लंबे समय तक दरबार साहिब की पहचान बनी रही।
समय के साथ खराब हो चुकी इस घड़ी की मरम्मत गुरु नानक निष्काम सेवक जत्था (यूके) की सेवा भावना और बाबा महिंदर सिंह के मार्गदर्शन में उसी मूल कंपनी से कराई गई। मरम्मत पूर्ण होने के बाद इसे पूरी श्रद्धा और मर्यादा के साथ पुनः स्थापित किया गया। SGPC प्रबंधन की ओर से गुरु नानक निष्काम सेवक जत्था (यूके) का विशेष धन्यवाद किया गया है। इस ऐतिहासिक घड़ी की वापसी को सिख विरासत के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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