चंडीगढ़, 6 फरवरी : चंडीगढ़ स्थित पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा में चूक से जुड़े अधिकारी हरमनदीप सिंह हंस की संवेदनशील जिला मोहाली में तैनाती पर कड़े सवाल खड़े किए हैं। अदालत ने टिप्पणी की कि उनकी तैनाती के बाद से ही मोहाली में कानून-व्यवस्था लगातार बिगड़ती चली गई है।
हाईकोर्ट ने पूछा ‘मूक दर्शक बने रहेंगे क्या?’
जब राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि पंजाब में कई संगठित गैंग सक्रिय हैं, तो हाईकोर्ट ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए पूछा कि क्या सरकार और पुलिस मूक दर्शक बनकर सब कुछ देखती रहेंगी? अदालत ने स्पष्ट किया कि संगठित अपराध और गैंगवार पर रोक लगाना राज्य पुलिस की संवैधानिक जिम्मेदारी है।
कबड्डी खिलाड़ी राणा बलाचौरिया की हत्या से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस ए.एस. ग्रेवाल और जस्टिस दीपक मनचंदा की खंडपीठ ने कहा कि मोहाली में कानून-व्यवस्था लगभग पूरी तरह चरमरा चुकी है और पुलिस की नाकामी बर्दाश्त नहीं की जा सकती।
पिछली सुनवाई के दौरान भी फायरिंग
अदालत ने याद दिलाया कि पिछली सुनवाई के दौरान ही मोहाली में फायरिंग की एक गंभीर घटना सामने आई थी, जो हालात की गंभीरता को दर्शाती है। हाईकोर्ट ने जुलाई 2025 की उस घटना का भी जिक्र किया, जिसमें मोहाली अदालत के चौकीदार के साथ एक पुलिस इंस्पेक्टर ने मारपीट की थी। घटना की वीडियो रिकॉर्डिंग मौजूद होने और सीजेएम के स्पष्ट आदेशों के बावजूद आठ महीने तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
एसएसपी के तबादले पर भी संकेत
खंडपीठ ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि कभी अदालत के बाहर फायरिंग हो जाती है और कभी अदालत का कर्मचारी पुलिस के हाथों पीटा जाता है। आखिर यह सब क्या चल रहा है? अदालत ने कहा कि यह स्थिति सीधे तौर पर एसएसपी मोहाली की कार्यप्रणाली को उजागर करती है। हाईकोर्ट ने यहां तक सवाल उठा दिया कि क्यों न तत्काल एसएसपी मोहाली के तबादले के आदेश जारी किए जाएं, ताकि कानून-व्यवस्था को लेकर एक सख्त संदेश दिया जा सके।
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