चंडीगढ़, 1 अप्रैल : हरियाणा सरकार ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को लगभग 590 करोड़ रुपये के बड़े घोटाले की जांच सौंपने की सिफारिश की है। यह मामला IDFC First Bank और AU Small Finance Bank से जुड़े खातों से संबंधित है। चंडीगढ़ पुलिस भी इस घोटाले की जांच कर रही है, जिसमें चंडीगढ़ प्रशासन के फंडों की हेराफेरी सामने आई है। हरियाणा के आठ सरकारी विभागों के 12 खातों के फंड इस घोटाले में शामिल पाए गए हैं।
15 आरोपियों की गिरफ्तारी
मौजूदा समय में राज्य विजिलेंस और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो इस मामले की जांच कर रहा है। अब तक 15 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। जांच में खुलासा हुआ है कि सरकारी फंडों की चोरी के लिए फर्जी फर्मों और कंपनियों का सहारा लिया गया। आरोपियों ने कई बैंक खातों के जरिए पैसे को इधर-उधर ट्रांसफर किया।
जांच में जिन संस्थाओं का नाम सामने आया है, उनमें आरएस ट्रेडर्स, कैप को फाइटेक सर्विसेज, एसआरआर प्लानिंग गुरूज प्राइवेट लिमिटेड और स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट शामिल हैं।
बैंक खातों का दुरुपयोग
कुल 12 खातों में से 10 खाते IDFC First Bank में और 2 खाते AU Small Finance Bank में थे। आरोपियों ने इन खातों के जरिए सरकारी धन को गैर-कानूनी तरीके से ट्रांसफर किया। जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपियों ने बैंकिंग रिकॉर्ड में हेराफेरी की और फर्जी डेबिट मेमो तैयार कर अपने और रिश्तेदारों से जुड़े खातों में पैसे ट्रांसफर किए।
इस संबंध में 23 फरवरी को पंचकूला स्थित थाने में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधित 2018) और भारतीय न्याय संहिता 2023 की धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी। अब इस मामले की गहराई से जांच के लिए CBI को जिम्मेदारी सौंपे जाने की सिफारिश की गई है, जिससे पूरे घोटाले का खुलासा होने की उम्मीद है।
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