नाभा, 4 फरवरी : पंजाब के श्रम विभाग द्वारा नए ‘लेबर कोड’ (किरत कोड) के ड्राफ्ट नियम केवल अंग्रेज़ी भाषा में जारी किए जाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। इस मुद्दे पर श्रमिक संगठनों ने कड़ा विरोध जताया है, जिसके बाद भाषा विभाग को हस्तक्षेप करना पड़ा है। डॉ. अंबेडकर वर्कर्स यूनियन ने श्रम विभाग के फैसले पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि जिन श्रमिकों के लिए ये कानून बनाए जा रहे हैं, अगर वे अपनी मातृभाषा में इन्हें समझ ही नहीं पाएंगे, तो सुझाव कैसे दे सकेंगे। यूनियन ने इसे श्रमिकों के अधिकारों के खिलाफ बताया है।
भाषा विभाग ने श्रम विभाग को लिखा पत्र
विवाद बढ़ने के बाद भाषा विभाग ने श्रम विभाग को पत्र लिखकर निर्देश दिए हैं कि लेबर कोड के ड्राफ्ट नियम पंजाबी भाषा में भी जारी किए जाएं, ताकि आम श्रमिक उन्हें समझकर अपने सुझाव दे सकें। गौरतलब है कि पंजाब राज्य भाषा कानून के बावजूद कई अहम कानूनों जैसे मनरेगा और बीओसीडब्ल्यू (BOCW) के पंजाबी अनुवाद के लिए लोग वर्षों से संघर्ष कर रहे हैं। भाषा विभाग पहले भी 64 सरकारी विभागों को मातृभाषा में काम करने के लिए नोटिस जारी कर चुका है, लेकिन जमीनी स्तर पर अभी भी अंग्रेज़ी का वर्चस्व बना हुआ है।
20 फरवरी से पहले पंजाबी में ड्राफ्ट जारी करने की मांग
श्रमिक संगठनों ने मांग की है कि 20 फरवरी तक सुझाव लेने की अंतिम तिथि से पहले लेबर कोड का ड्राफ्ट तुरंत पंजाबी में उपलब्ध कराया जाए, ताकि आम कामगार अपने अधिकारों के लिए आवाज़ उठा सकें। इस पूरे मामले ने एक बार फिर प्रशासनिक कामकाज में मातृभाषा के उपयोग और श्रमिकों की भागीदारी से जुड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि श्रम विभाग भाषा विभाग के निर्देशों पर कितनी जल्दी अमल करता है।
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