February 5, 2026

लंबी और स्वस्थ ज़िंदगी का नया राज, उम्र के साथ बदलनी होगी डाइट

लंबी और स्वस्थ ज़िंदगी का नया राज...

नई दिल्ली, 26 जनवरी : लंबी उम्र का रहस्य सिर्फ इस बात में नहीं छिपा कि आप क्या खाते हैं, बल्कि इस बात में भी है कि किस उम्र में क्या खाते हैं। हालिया शोध में सामने आया है कि उम्र बढ़ने के साथ खानपान में संतुलित बदलाव करने से 100 साल तक जीने की संभावना बढ़ सकती है। चीन में किए गए एक बड़े अध्ययन में 80 साल से अधिक उम्र के 5,000 से ज्यादा बुज़ुर्गों की डाइट और सेहत पर लंबे समय तक नजर रखी गई। शोध में पाया गया कि जो बुज़ुर्ग पूरी तरह मांस से दूर थे, उनके 100 साल तक पहुंचने की संभावना मांस खाने वालों की तुलना में थोड़ी कम थी।

असली वजह मांस नहीं, कुपोषण और कम वज़न

हालांकि शोधकर्ताओं के मुताबिक यह नतीजा उतना चौंकाने वाला नहीं है जितना पहली नजर में लगता है।
असल समस्या मांस न खाना नहीं, बल्कि कम वज़न और पोषण की कमी है।
शोध में साफ हुआ कि पूरी तरह शाकाहारी और कम वज़न वाले बुज़ुर्गों में ही लंबी उम्र की संभावना कम देखी गई।

बढ़ती उम्र में बदल जाती हैं शरीर की ज़रूरतें

उम्र बढ़ने के साथ शरीर में कई बदलाव आते हैं मांसपेशियां कमजोर होने लगती हैं, हड्डियों की घनत्व कम होती है, भूख घट जाती है, इस कारण बुज़ुर्गों में कुपोषण और कमजोरी का खतरा बढ़ जाता है। इस उम्र में शरीर को कम कैलोरी लेकिन ज्यादा पोषक तत्वों की जरूरत होती है।

मछली, दूध और अंडे खाने वालों की उम्र भी लंबी

शोध में यह भी सामने आया कि जो बुज़ुर्ग अपने आहार में मछली, दूध या अंडे शामिल करते थे, उनकी उम्र मांस खाने वालों के बराबर ही लंबी रही।
इन खाद्य पदार्थों से शरीर को प्रोटीन, विटामिन B-12, कैल्शियम, विटामिन D जैसे जरूरी पोषक तत्व मिलते हैं, जो बुढ़ापे में मांसपेशियों और हड्डियों के लिए बेहद अहम होते हैं।

उम्र के साथ बदलनी पड़ती है प्राथमिकता

विशेषज्ञों का कहना है कि युवा अवस्था में शाकाहारी भोजन कई बीमारियों से बचाव में मददगार होता है, लेकिन बहुत अधिक उम्र में प्राथमिकताएं बदल जाती हैं।
उस समय लक्ष्य बीमारियों से बचाव नहीं, बल्कि ताकत बनाए रखना, वजन गिरने से रोकना, कुपोषण से बचाव होता है।

40 की डाइट, 90 में नहीं होती पर्याप्त

जो खानपान 40 या 50 साल की उम्र में फायदेमंद होता है, जरूरी नहीं कि वही 90 साल की उम्र में भी पर्याप्त हो। विशेषज्ञों के अनुसार, उम्र के साथ संतुलित बदलाव ही स्वस्थ और लंबी ज़िंदगी की असली चाबी है।

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