चंडीगढ़/जयपुर, 20 मार्च : भगवंत मान द्वारा राजस्थान से पिछले 66 वर्षों के पानी के उपयोग के बदले लगभग 1.44 लाख करोड़ रुपये की मांग किए जाने के बाद पंजाब और राजस्थान के बीच विवाद गहरा गया है। भुगतान न होने पर पानी रोकने की चेतावनी ने इस मुद्दे को और तूल दे दिया है।
राजस्थान ने किया दावा खारिज
राजस्थान सरकार ने पंजाब के दावे को सिरे से नकार दिया है। राज्य के जल संसाधन विभाग का कहना है कि जिस समझौते का हवाला दिया जा रहा है, उसका मौजूदा परिस्थितियों में कोई कानूनी आधार नहीं है। राजस्थान के अनुसार, यह समझौता 1920 में बहावलपुर रियासत और ब्रिटिश सरकार के बीच हुआ था, न कि आज के पंजाब और राजस्थान के बीच। इसलिए इसे वर्तमान राज्यों पर लागू नहीं माना जा सकता।
आजादी के बाद बदले हालात
राजस्थान ने यह भी स्पष्ट किया कि आजादी के बाद राज्यों का पुनर्गठन हुआ और परिस्थितियां पूरी तरह बदल गईं। इसके बाद 1955, 1958 और 1988 में पानी के बंटवारे को लेकर नए समझौते हुए, जिनमें किसी तरह के भुगतान का प्रावधान नहीं है। दोनों राज्यों के बीच पानी के बंटवारे का मामला पहले से ही अंतरराज्यीय जल विवाद ट्रिब्यूनल में लंबित है, जिससे मामला और जटिल बना हुआ है।
केंद्र सरकार तक पहुंचेगा मामला
सूत्रों के मुताबिक, भजन लाल शर्मा जल्द ही इस मुद्दे पर केंद्र सरकार के सामने राज्य का पक्ष रख सकते हैं। वहीं राज्य के जल संसाधन मंत्री सुरेश रावत ने भी पंजाब की मांग से असहमति जताई है। दोनों राज्यों के सख्त रुख को देखते हुए आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गरमा सकता है, जिससे राजनीतिक और कानूनी टकराव बढ़ने की संभावना है।

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