February 14, 2026

अकाल तख़्त और पंथ को ढाल बनाकर बचना चाहती है शिरोमणि कमेटी व अकाली दल: मुख्यमंत्री

अकाल तख़्त और पंथ को ढाल बनाकर...

चंडीगढ़, 30 दिसंबर : पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (शिरोमणि कमेटी) और अकाली दल पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि ये दोनों संस्थाएं अपने गलत कामों से बचने के लिए श्री अकाल तख़्त साहिब और पंथ को ढाल के रूप में इस्तेमाल कर रही हैं। उन्होंने कहा कि यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि पवित्र संस्थाओं की आड़ लेकर गंभीर अपराधों पर पर्दा डालने की कोशिश की जा रही है।

328 लापता स्वरूपों पर कार्रवाई न होने से संगत नाराज़

मुख्यमंत्री ने कहा कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के 328 स्वरूपों के लापता होने का मामला वर्षों से लंबित है, जिस कारण पंजाबी और सिख समाज गहरे सदमे और रोष में है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब तक कोई ठोस कार्रवाई न होने से संगत में भारी नाराज़गी है और पंथक संगठनों तथा संत समाज द्वारा लगातार न्याय की मांग की जा रही है।

चंडीगढ़ में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान भगवंत सिंह मान ने कहा कि राज्य सरकार ने अपनी नैतिक जिम्मेदारी निभाते हुए इस मामले में एफ.आई.आर. दर्ज की है और जांच के लिए विशेष जांच टीम (एसआईटी) का गठन किया है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल दोषियों को सजा दिलाना और पवित्र स्वरूपों की सुरक्षित बरामदगी सुनिश्चित करना है।

एफ.आई.आर. के बाद शिरोमणि कमेटी का विरोध

मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि एफ.आई.आर. दर्ज होते ही शिरोमणि कमेटी ने अपने आकाओं के निर्देश पर राज्य सरकार के खिलाफ बयानबाज़ी शुरू कर दी और धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप का झूठा आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि शिरोमणि कमेटी के मुखिया स्वयं स्वीकार कर चुके हैं कि कमेटी में रोज़ाना 10–12 घोटाले होते हैं, जो गोलक के धन के दुरुपयोग की ओर इशारा करता है।

प्रस्ताव पारित, लेकिन कार्रवाई शून्य

भगवंत सिंह मान ने बताया कि शिरोमणि कमेटी की अंतरिम कमेटी ने वर्ष 2020 में दोषी कर्मचारियों और प्रकाशकों के खिलाफ सख़्त कार्रवाई के प्रस्ताव पारित किए थे। इसके बावजूद आज तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्य सचिव डॉ. रूप सिंह और एस.एस. कोहली एंड एसोसिएट्स के खिलाफ कार्रवाई के प्रस्ताव भी दबा दिए गए।

प्रभावशाली लोगों को बचाने का आरोप

मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि प्रभावशाली और धनाढ्य व्यक्तियों को बचाने के लिए शिरोमणि कमेटी ने बाद में अपने ही सभी प्रस्ताव वापस ले लिए। उन्होंने कहा कि जब राज्य सरकार स्वरूपों की बरामदगी और बेअदबी जैसे अपराधों को रोकने के लिए कदम उठा रही है, तो इसे जानबूझकर धार्मिक रंग दिया जा रहा है। भगवंत सिंह मान ने दो टूक कहा कि शिरोमणि कमेटी द्वारा पारित प्रस्तावों के आधार पर आपराधिक कार्रवाई करना राज्य सरकार का संवैधानिक अधिकार है।

उन्होंने कहा कि सरकार पंथ के मामलों में हस्तक्षेप नहीं कर रही, बल्कि कानून के तहत अपने कर्तव्य का निर्वहन कर रही है और दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।

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