चंडीगढ़, 8 नवम्बर : पंजाब विश्वविद्यालय की शासी संस्था ‘सीनेट’ के स्वरूप में बदलाव के खिलाफ छात्र आंदोलन के आगे झुकते हुए केंद्र सरकार ने आज इस संबंध में जारी अधिसूचना रद्द कर दी। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा मीडिया को भेजी गई जानकारी के अनुसार, छात्रों की मांग मान ली गई है और पंजाब विश्वविद्यालय की सीनेट में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा।
साथ ही कहा गया कि 2 मार्च 2021 को विश्वविद्यालय के कुलाधिपति द्वारा गठित उच्च स्तरीय समिति की सिफारिश के आधार पर और विभिन्न हितधारकों के परामर्श से, भारत सरकार ने पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966 (1966 का 31) की धारा 72 की उप-धाराओं (1), (2) और (3) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, पंजाब विश्वविद्यालय की सीनेट और सिंडिकेट के संविधान और संरचना में संशोधन करने के लिए एक अधिसूचना जारी की थी।
अधिसूचना जारी होने के बाद, छात्रों, शिक्षकों, पूर्व कुलपतियों और पंजाब विश्वविद्यालय के वर्तमान कुलपति से प्रतिक्रिया प्राप्त करने के बाद, शिक्षा मंत्रालय ने इस पर पुनर्विचार किया और उपरोक्त आदेश को रद्द करने का निर्णय लिया।
केंद्र ने पंजाब यूनीवर्सिटी सैनेट को कम किया था
गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने 30 अक्टूबर को जारी एक अधिसूचना में पंजाब विश्वविद्यालय की 91 सदस्यीय सीनेट का आकार घटा दिया था, जिससे स्नातक निर्वाचन क्षेत्र समाप्त हो गया और एक मनोनीत सीनेट का प्रावधान किया गया। इसके विरोध में छात्रों ने ‘पंजाब विश्वविद्यालय बचाओ’ मोर्चा के बैनर तले कुलपति कार्यालय के सामने एक बड़ा संघर्ष शुरू किया था, जिसका सभी राजनीतिक दलों, किसान-मजदूर संगठनों, शिक्षक संगठनों, कलाकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं आदि ने समर्थन किया था।
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