January 19, 2026

सुप्रीम कोर्ट ने कॉलेजों-यूनिवर्सिटीयों में खाली पद भरने के आदेश दिए

सुप्रीम कोर्ट ने कॉलेजों-यूनिवर्सिटीयों में...

नई दिल्ली, 19 जनवरी : देशभर की उच्च शिक्षा संस्थाओं में खाली पदों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने कॉलेजों और यूनिवर्सिटियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि टीचिंग और नॉन-टीचिंग स्टाफ के सभी रिक्त पद चार महीनों के भीतर भरे जाएं। इसके साथ ही प्रशासनिक पदों को लेकर भी सख्त समय-सीमा तय की गई है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सरकारी और निजी दोनों तरह की उच्च शिक्षा संस्थाओं में फैकल्टी और नॉन-टीचिंग स्टाफ की भारी कमी को देखते हुए सभी खाली पदों को चार महीने की अवधि में भरना अनिवार्य है। अदालत ने इसे शिक्षा की गुणवत्ता और संस्थानों के सुचारू संचालन के लिए जरूरी बताया।

वाइस चांसलर और रजिस्ट्रार पर खास निर्देश

अदालत ने स्पष्ट किया कि वाइस चांसलर, रजिस्ट्रार और अन्य अहम प्रशासनिक पद यदि खाली होते हैं, तो उन्हें एक महीने के भीतर भरा जाना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि लंबे समय तक इन पदों का खाली रहना संस्थानों के कामकाज को प्रभावित करता है। सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिए कि भर्ती प्रक्रिया में पिछड़े वर्गों और कम प्रतिनिधित्व वाले समुदायों के लिए आरक्षित पदों को प्राथमिकता दी जाए। इसमें छात्रों से जुड़े आरक्षित पद भी शामिल होंगे, ताकि सामाजिक संतुलन और न्याय सुनिश्चित किया जा सके।

विशेष भर्ती अभियान चलाने की छूट

कोर्ट ने कहा कि उच्च शिक्षा संस्थान चाहें तो विशेष भर्ती अभियान चला सकती हैं। यह अभियान केंद्र और राज्य सरकारों के नियमों के अनुसार विभिन्न प्रकार के आरक्षण प्रावधानों के तहत आयोजित किए जा सकते हैं। यह आदेश जस्टिस जे.बी. पारडीवाला और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने दिया। मामला उच्च शिक्षा संस्थानों में छात्रों की बढ़ती आत्महत्या की घटनाओं से जुड़ा था। कोर्ट ने माना कि शिक्षकों और स्टाफ की कमी भी छात्रों पर मानसिक दबाव बढ़ाने का एक बड़ा कारण है।

सुचारू संचालन पर जोर

अदालत ने दोहराया कि उच्च शिक्षा संस्थानों में बेहतर शैक्षणिक माहौल और प्रशासनिक स्थिरता के लिए यह जरूरी है कि कोई भी अहम पद लंबे समय तक खाली न रहे।सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से देशभर के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में बड़ी संख्या में भर्तियों का रास्ता साफ हो गया है।

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