February 4, 2026

भारत–यूरोपीय संघ व्यापार समझौते से अमेरिका नाराज़, यूरोप पर उठाए सवाल

भारत–यूरोपीय संघ व्यापार समझौते से अमेरिका...

न्यूयॉर्क, 29 जनवरी : भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच हुए मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को लेकर अमेरिका ने कड़ी नाराज़गी जताई है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा है कि इस समझौते के मद्देनज़र यूरोपीय देशों का रुख “बेहद निराशाजनक” रहा और वे रूस से तेल खरीद के मुद्दे पर भारत पर टैक्स लगाने में वॉशिंगटन का साथ देने को तैयार नहीं थे।

यूरोप के रवैये पर अमेरिकी वित्त मंत्री की टिप्पणी

सीएनबीसी के कार्यक्रम ‘स्क्वैक ऑन द स्ट्रीट’ को दिए इंटरव्यू में स्कॉट बेसेंट ने कहा, “यूरोपीय वही करेंगे जो उन्हें सबसे अच्छा लगता है, लेकिन मुझे वे बेहद निराशाजनक लगते हैं, खासकर तब जब वे यूक्रेन–रूस युद्ध की फ्रंट लाइन पर हैं।” बेसेंट ने कहा कि भारत ने प्रतिबंधों के बावजूद रूसी तेल खरीदना शुरू किया और हैरानी की बात यह है कि उससे बने रिफाइंड उत्पादों को खरीदने वालों में यूरोपीय देश भी शामिल थे। उन्होंने आरोप लगाया, “यूरोपीय अपने ही खिलाफ चल रही जंग को फंड कर रहे हैं यह कल्पना से परे है।”

भारत पर अमेरिकी टैरिफ, यूरोप ने नहीं दिया साथ

अमेरिकी वित्त मंत्री ने बताया कि अमेरिका ने रूसी तेल खरीद को लेकर भारत पर 25 फीसदी टैरिफ या प्रतिबंध लगाए, लेकिन यूरोपीय देश इस कदम में अमेरिका के साथ नहीं आए। उनका कहना था कि इसी बीच यूरोपीय देश भारत के साथ बड़ा व्यापारिक समझौता करने में जुटे रहे।

यूक्रेन बनाम व्यापार—किसे प्राथमिकता?

बेसेंट ने तीखा तंज कसते हुए कहा, “जब भी आप किसी यूरोपीय को यूक्रेनी लोगों की अहमियत पर बोलते सुनें, तो याद रखें कि उन्होंने यूक्रेन से पहले व्यापार को चुना है। यूरोपीय व्यापार, यूक्रेन में युद्ध खत्म करने से ज्यादा अहम है।” अमेरिका का मानना है कि भारत–ईयू के बीच यह बड़ा व्यापार समझौता वॉशिंगटन के बिना आगे बढ़ रहा है, जो अमेरिकी रणनीतिक और आर्थिक हितों के लिए खतरा बन सकता है। इसी कारण अमेरिका में इस समझौते को लेकर असंतोष और आलोचना तेज होती जा रही है।

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