April 6, 2026

छाती छूना, नाड़ा खींचना दुष्कर्म की कोशिश, सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट का फैसला पलटा

छाती छूना, नाड़ा खींचना दुष्कर्म की कोशिश...

नई दिल्ली, 19 फरवरी : सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के विवादित फैसले को रद्द करते हुए स्पष्ट किया है कि किसी महिला की छाती को छूना और पजामे का नाड़ा खींचना ‘दुष्कर्म की कोशिश’ की श्रेणी में आता है। हाई कोर्ट ने अपने आदेश में इन हरकतों को केवल ‘दुष्कर्म से पहले की तैयारी’ बताया था।

हाई कोर्ट के आदेश पर स्वत: संज्ञान

सुप्रीम कोर्ट ने 10 फरवरी को स्वत: संज्ञान (सुओ मोटू) लेते हुए मामले की सुनवाई की थी। यह नोटिस Allahabad High Court के उस आदेश पर लिया गया था, जिसमें कहा गया था कि केवल छाती को छूना और पजामे का नाड़ा खींचना दुष्कर्म की कोशिश नहीं माना जा सकता। भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस एन. वी. अंजारिया की पीठ ने कहा कि आपराधिक न्यायशास्त्र के स्थापित सिद्धांतों की स्पष्ट रूप से गलत व्याख्या की गई है।

अदालत ने कहा कि वह हाई कोर्ट के इस निष्कर्ष से सहमत नहीं हो सकती कि आरोप केवल दुष्कर्म की तैयारी तक सीमित थे। पीठ ने अपने फैसले में कहा कि प्रथम दृष्टया शिकायतकर्ता और अभियोजन पक्ष ने दुष्कर्म की कोशिश के प्रावधान लागू करने के लिए पर्याप्त आधार प्रस्तुत किया है।

पोक्सो एक्ट के तहत आरोप बहाल

सुप्रीम कोर्ट ने Protection of Children from Sexual Offences Act (पोक्सो एक्ट) के तहत दो आरोपियों के खिलाफ दुष्कर्म की कोशिश के मूल आरोपों को बहाल कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि आरोपियों की हरकतें स्पष्ट रूप से अपराध की कोशिश को दर्शाती हैं और इसे केवल तैयारी नहीं माना जा सकता। अदालत ने कहा कि स्थापित आपराधिक न्याय सिद्धांतों की गलत व्याख्या के कारण हाई कोर्ट का विवादित आदेश रद्द किया जाना उचित है।

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