न्यूयार्क, 2 अप्रैल : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय समयानुसार गुरुवार सुबह व्हाइट हाउस में फिर ईरान युद्ध पर एक भाषण दिया। इस संबोधन में ट्रंप ने मुख्यतः वही बातें दोहराईं, जो उन्होंने पिछले कुछ दिनों में ईरान के खिलाफ युद्ध के संदर्भ में कही थीं। उन्होंने बोला कि अमेरिका-इसराइल सैन्य अभियान अपने “मुख्य रणनीतिक मक़सदों” को पूरा करने के करीब है और उन्होंने अनुमान लगाया कि यह संघर्ष अगले दो से तीन हफ्तों तक जारी रह सकता है।
चेतावनियों को भी दोहराया
इसके साथ ही, उन्होंने ईरान के खिलाफ सामान्य चेतावनियों को भी दोहराया, जिसमें ईरान को “पाषाण युग में वापस पहुंचाने” की बात शामिल थी। यदि पिछले एक हफ्ते में ट्रंप के ट्रुथ सोशल पर किए गए पोस्ट को देखा जाए, तो उनका यह राष्ट्र के नाम संबोधन काफी हद तक उन पोस्टों से मेल खाता है।
नाराज जनता को गिनाए युद्ध के फायदे
राष्ट्रपति ने अमेरिकी जनता को इस युद्ध के लाभों के बारे में समझाने का प्रयास किया, जो कि आवश्यक भी था, क्योंकि हाल के सर्वेक्षणों से पता चलता है कि 28 फ़रवरी को आरंभ हुए इस सैन्य अभियान के प्रति अधिकांश मतदाता असहमति व्यक्त कर रहे हैं। ट्रंप ने लोगों से आग्रह किया कि वे इस युद्ध को अपने भविष्य में एक “निवेश” के रूप में देखें, यह बताते हुए कि यह संघर्ष पिछले एक सदी या उससे अधिक समय में अमेरिका की भागीदारी वाले अन्य युद्धों की तुलना में कुछ भी नहीं है।
हालांकि, इस भाषण में उन लोगों के लिए बहुत कम जानकारी थी जो यह जानने के इच्छुक थे कि यह युद्ध किस दिशा में बढ़ रहा है या अमेरिका के लिए इससे बाहर निकलने के संभावित रास्ते क्या हो सकते हैं। इस संदर्भ में कई महत्वपूर्ण सवालों के उत्तर स्पष्ट नहीं हो पाए।
अभी भी कई सवालों के चाहिए जवाब
इस बीच अभी भी कई सवालों के चाहिए जैसे एक महत्वपूर्ण प्रश्न यह उठता है कि क्या प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू की सरकार पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा निर्धारित कुछ हफ्तों की समय-सीमा से सहमत है। इस विषय पर फिलहाल कोई स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है, और मौजूदा परिस्थितियों में इस पर कुछ भी कहना कठिन है।
इसके अलावा, यह जानना आवश्यक है कि उस 15-सूत्रीय शांति योजना का क्या हुआ, जिसे हाल ही में व्हाइट हाउस ने ईरान से स्वीकार करने के लिए कहा था। ट्रंप ने अपने संबोधन में इस योजना का कोई उल्लेख नहीं किया, जिससे यह सवाल उठता है कि क्या अमेरिका अपनी कई मांगों, जैसे समृद्ध यूरेनियम के भंडार को वापस लेने की मांग, से पीछे हट रहा है। इस संदर्भ में भी स्थिति स्पष्ट नहीं है, और यह देखना होगा कि आगे की बातचीत में क्या दिशा लेती है।
यह भी देखें : 54 साल बाद चंद्रमा की ओर मानव मिशन: आर्टेमिस-2 की ऐतिहासिक लॉन्चिंग

More Stories
Global Soft Power Index रिपोर्ट में भारत टॉप 10 से बाहर
54 साल बाद चंद्रमा की ओर मानव मिशन: आर्टेमिस-2 की ऐतिहासिक लॉन्चिंग
नाटो से नाराज डोनाल्ड ट्रंप ने नाटो को बताया कगजी शेर, अलग होगा अमेरिका