न्यूयॉर्क/वाशिंगटन, 21 सितंबर : अमेरिकी संघीय आंकड़ों के अनुसार, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) इस कार्यक्रम का दूसरा सबसे बड़ा लाभार्थी है, जिसके 2025 तक 5,000 से ज़्यादा स्वीकृत H-1B वीज़ा होंगे। इस मामले में अमेज़न पहले स्थान पर है। अमेरिकी नागरिकता और आव्रजन सेवाओं (U.S.C.I.S.) के अनुसार, जून 2025 तक अमेज़न के 10,044 कर्मचारी H-1B वीज़ा का उपयोग कर रहे थे। 5,505 स्वीकृत H-1B वीज़ा के साथ TCS दूसरे स्थान पर थी।
अन्य शीर्ष लाभ प्राप्त करने वाली कंपनियों में माइक्रोसॉफ्ट (5189), मेटा (5123), एप्पल (4202), गूगल (4181), डेलॉइट (2353), इंफोसिस (2004), विप्रो (1523) और टेक महिंद्रा अमेरिका (951) शामिल हैं। ट्रंप प्रशासन ने एच-1बी वीज़ा पर 100,000 अमेरिकी डॉलर का वार्षिक शुल्क लगाने की घोषणा की है। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य कार्यक्रम के “व्यवस्थित दुरुपयोग” को रोकना है। हालाँकि, यह निर्णय अमेरिका में भारतीय आईटी और पेशेवर कर्मचारियों पर बुरा प्रभाव डाल सकता है।
यह भी देखें : रूस-यूक्रेन युद्ध से पैसा कमा रहा है अमेरिका: ट्रंप

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