February 5, 2026

रोटियां लपेटने में एल्युमिनियम फॉयल का इस्तेमाल सेहत पर पड़ सकता है भारी

रोटियां लपेटने में एल्युमिनियम फॉयल का...

नई दिल्ली, 27 जनवरी : आजकल लगभग हर घर में रोटियां लपेटने या बच्चों का टिफिन पैक करने के लिए एल्युमिनियम फॉयल का इस्तेमाल आम हो गया है। लोगों को लगता है कि इससे खाना लंबे समय तक गर्म रहता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह आदत आपकी सेहत और पर्यावरण दोनों के लिए खतरनाक साबित हो सकती है? कई शोधों में यह सामने आया है कि जब गरम, खट्टा या मसालेदार खाना एल्युमिनियम फॉयल में पैक किया जाता है, तो फॉयल से एल्युमिनियम के अंश खाने में मिल जाते हैं। रोजाना इस तरह का खाना खाने से शरीर पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।

एल्युमिनियम फॉयल से होने वाले नुकसान

दिमागी बीमारियों का खतरा
एल्युमिनियम का सीधा असर नर्वस सिस्टम पर पड़ता है, जिससे अल्जाइमर (भूलने की बीमारी) जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है।

हड्डियों की कमजोरी
शरीर में एल्युमिनियम की मात्रा बढ़ने से कैल्शियम का संतुलन बिगड़ सकता है, जिससे हड्डियां कमजोर होने लगती हैं।

पर्यावरण को नुकसान
एल्युमिनियम फॉयल जल्दी नष्ट नहीं होता, जिससे कचरा और प्रदूषण बढ़ता है।

क्या है सबसे बेहतर ‘देसी’ विकल्प?

अगर आप फॉयल का इस्तेमाल बंद करना चाहते हैं, तो दादी-नानी के जमाने का आजमाया हुआ तरीका—केले का पत्ता—सबसे बेहतरीन विकल्प है।

केले के पत्ते के फायदे

प्राकृतिक गुणों से भरपूर
केले के पत्तों में एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-ऑक्सीडेंट गुण होते हैं, जो खाने को खराब होने से बचाते हैं।

सेहत के लिए फायदेमंद
इनमें पॉलीफेनॉल्स के साथ विटामिन A और C पाए जाते हैं। गरम खाना रखने पर ये पोषक तत्व भोजन में मिल जाते हैं।

बेहतर पाचन
केले के पत्ते में पैक या परोसा गया खाना पाचन शक्ति को बेहतर बनाता है।

स्वाद में बढ़ोतरी
केले के पत्ते में रखा खाना प्राकृतिक रूप से ज्यादा स्वादिष्ट लगता है।

केले के पत्ते न मिलें तो क्या करें?

अगर केले के पत्ते उपलब्ध न हों, तो आप ये सुरक्षित विकल्प अपना सकते हैं—

सूती कपड़ा (मलमल कपड़ा)
रोटियां लपेटने के लिए साफ सूती या मलमल के कपड़े का इस्तेमाल करें।

बटर पेपर
यह एल्युमिनियम फॉयल की तुलना में ज्यादा सुरक्षित और बेहतर विकल्प माना जाता है।

सेहत के लिए छोटी आदत, बड़ा फायदा

रोजमर्रा की छोटी-छोटी आदतों में बदलाव करके आप न सिर्फ अपनी सेहत बचा सकते हैं, बल्कि पर्यावरण को भी सुरक्षित रख सकते हैं। अगली बार रोटियां या टिफिन पैक करते समय फॉयल की जगह देसी और सुरक्षित विकल्प जरूर अपनाएं।

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