नई दिल्ली, 27 जनवरी : भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच हुए ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) का असर दवा उद्योग पर साफ दिखाई दे सकता है। इस समझौते के तहत कुछ दवाओं पर आयात शुल्क घटने या समाप्त होने की संभावना है, जिनमें वजन घटाने वाली और जीवन-रक्षक दवाएं भी शामिल हैं। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि कीमतों में वास्तविक कमी पेटेंट, नियामकीय ढांचे और सप्लाई चेन में लाभ किस तरह आगे बढ़ाया जाता है, इस पर निर्भर करेगी।
भारत-EU व्यापार में फार्मा सेक्टर की अहम भूमिका
भारत-EU व्यापारिक संबंधों में फार्मास्यूटिकल क्षेत्र की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। भारत जेनेरिक दवाओं और वैक्सीन के क्षेत्र में वैश्विक अग्रणी है, जबकि यूरोपीय संघ कई बहुराष्ट्रीय दवा कंपनियों का केंद्र है, जो उच्च-मूल्य और नवोन्मेषी थैरेपी का उत्पादन करती हैं। नए समझौते के तहत भारत में EU से होने वाले अधिकांश निर्यात जिनमें केमिकल, मेडिकल डिवाइस और दवाएं शामिल हैं पर टैरिफ को चरणबद्ध तरीके से समाप्त किए जाने की उम्मीद है।
क्या व्यापार समझौते से भारत में दवाएं सस्ती होंगी?
आधिकारिक बयानों के अनुसार, यह FTA यूरोपीय संघ के निर्यात पर लगभग 4 अरब यूरो तक के टैरिफ को खत्म कर देगा। इसमें फार्मास्यूटिकल उत्पाद भी शामिल हैं। इससे आयातित दवाओं, मेडिकल उपकरणों और एक्टिव फार्मास्यूटिकल इंग्रीडिएंट्स (API) पर कस्टम ड्यूटी कम हो सकती है, जिससे इनकी कुल लागत घटने की संभावना बनेगी।
वजन घटाने वाली दवाओं पर क्या पड़ेगा असर?
नई पीढ़ी की वजन घटाने वाली दवाएं जैसे ओजेम्पिक, मोंजारो और वेगोवी दुनिया की सबसे महंगी दवाओं में गिनी जाती हैं। ये GLP-1 रिसेप्टर एगोनिस्ट श्रेणी में आती हैं और अभी ज्यादातर पेटेंट सुरक्षा के तहत हैं। भारत में इन दवाओं की कीमतों पर नेशनल फार्मास्यूटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (NPPA) का सीधा नियंत्रण नहीं है, इसलिए इनकी कीमतें बाजार तय करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल टैरिफ घटने से बड़ी कीमत कटौती की उम्मीद कम है। वास्तविक राहत तब मिलेगी, जब पेटेंट समाप्त होने के बाद घरेलू कंपनियां इनके जेनेरिक या बायोसिमिलर संस्करण पेश करेंगी।
जीवन-रक्षक दवाओं पर सबसे ज्यादा असर की उम्मीद
इस समझौते का सबसे बड़ा लाभ जीवन-रक्षक दवाओं में देखने को मिल सकता है। खासकर कैंसर, हृदय रोग, एंडोक्रिनोलॉजी और दुर्लभ बीमारियों में इस्तेमाल होने वाली दवाओं पर। कई उन्नत थैरेपी जैसे कुछ कैंसर दवाएं, इम्यूनोथैरेपी और एंजाइम रिप्लेसमेंट थैरेपी मुख्य रूप से यूरोप में बनती हैं। टैरिफ कम होने से इन दवाओं की आयात लागत घटेगी और भारत में इनके दाम कुछ हद तक कम हो सकते हैं।
India-EU मुक्त व्यापार समझौता दवा क्षेत्र के लिए लंबे समय में फायदेमंद साबित हो सकता है। हालांकि तुरंत और बड़ी कीमत कटौती की उम्मीद सीमित है, लेकिन जीवन-रक्षक और उच्च-मूल्य दवाओं की उपलब्धता और पहुंच में सुधार होने की संभावना जरूर बढ़ेगी।
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