चंडीगढ़, 6 जनवरी : पाकिस्तान में सिख जत्थे के साथ जाकर धर्म परिवर्तन करने और निकाह करने वाली भारतीय महिला सरबजीत कौर उर्फ नूर हुसैन की भारत वापसी को लेकर बीते कई दिनों से रहस्य बना हुआ है। पाकिस्तानी मीडिया और सोशल मीडिया पर यह खबरें सामने आई थीं कि उसे वाघा सीमा के रास्ते भारत भेजा जा रहा है, लेकिन दो दिन बीत जाने के बावजूद वह भारतीय सीमा पर नहीं पहुंची है।
नवंबर 2024 में सिख जत्थे के साथ गई थी पाकिस्तान
गौरतलब है कि सरबजीत कौर नवंबर 2024 में गुरु नानक देव जी के प्रकाश पर्व के अवसर पर सिख श्रद्धालुओं के जत्थे के साथ पाकिस्तान गई थी। वहां पहुंचने के बाद उसने इस्लाम धर्म स्वीकार कर लिया और लाहौर निवासी नासिर हुसैन से निकाह कर अपना नाम नूर हुसैन रख लिया।
सीमा बंद होने से नहीं हो सकी डिपोर्टेशन
पाकिस्तानी मीडिया हाउस डॉन की रिपोर्ट के अनुसार, सोमवार को वाघा-अटारी सीमा बंद होने के कारण पाकिस्तानी अधिकारी सरबजीत कौर को भारत डिपोर्ट नहीं कर सके। रिपोर्ट में बताया गया कि उसका वीजा 13 नवंबर तक वैध था और वह उन 1,992 सिख श्रद्धालुओं में शामिल थी जो धार्मिक कार्यक्रमों के बाद भारत लौट आए थे, लेकिन वह पीछे रह गई थी।
इस्लाम कबूल कर नासिर हुसैन से किया निकाह
डॉन की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 5 नवंबर को सरबजीत कौर ने इस्लाम धर्म स्वीकार किया, पाकिस्तानी नागरिक नासिर हुसैन से विवाह किया और अपना नाम नूर हुसैन रख लिया। पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री रमेश सिंह अरोड़ा ने दावा किया था कि सभी कानूनी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद महिला को भारत भेज दिया गया है। हालांकि, पंजाब रेंजर्स के अधिकारियों ने बताया कि सीमा बंद होने के कारण डिपोर्टेशन की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी।
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