February 4, 2026

थाली में परोसा जा रहा है सफेद ज़हर, आप जरूरत से 5 गुणा अधिक नमक खा रहे हैं!

थाली में परोसा जा रहा है सफेद ज़हर...

नई दिल्ली, 4 फरवरी : बदलती जीवनशैली के साथ भारतीयों की खाने-पीने की आदतें तेजी से बिगड़ रही हैं, जिसका सीधा असर सेहत पर पड़ रहा है। संसद के उच्च सदन राज्यसभा में यह गंभीर मुद्दा उठा कि भारत में लोग जरूरत से कहीं अधिक नमक का सेवन कर रहे हैं, जो कई गंभीर बीमारियों को न्योता दे रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने 2025 तक प्रति व्यक्ति रोजाना दो ग्राम से कम नमक खाने की सिफारिश की है, जबकि भारत में औसतन लोग 8 से 11 ग्राम तक नमक का सेवन कर रहे हैं। यह मात्रा अनुशंसित सीमा से करीब पांच गुना अधिक है।

बच्चों की सेहत पर भी खतरा

बिस्कुट, केक, फ्लेवर्ड मिल्क, कोल्ड ड्रिंक और अन्य प्रोसेस्ड फूड में मौजूद अत्यधिक नमक बच्चों में भी कई बीमारियों का कारण बन रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार कम उम्र में अधिक नमक का सेवन भविष्य में हाई ब्लड प्रेशर, दिल की बीमारियों और किडनी संबंधी समस्याओं को बढ़ा सकता है।

संसद में उठा स्वास्थ्य संकट का मुद्दा

कांग्रेस सांसद मुकुल वासनिक ने प्रश्नकाल के दौरान कहा कि अधिक नमक सेवन के कारण देश में गंभीर बीमारियों का संकट खड़ा हो रहा है। उन्होंने सरकार से इस पर ठोस कदम उठाने की मांग की। स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने सदन को बताया कि सरकार आम लोगों को जागरूक करने के लिए ‘ईट राइट इंडिया’ जैसे कार्यक्रम चला रही है। उनका कहना है कि संतुलित आहार और स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देना सरकार की प्राथमिकता है। भाजपा सांसद जसवंत सिंह परमार ने भी इस विषय पर चिंता जताई।

दवाइयों की कीमतों पर भी सवाल

आम आदमी पार्टी की सांसद स्वाति मालीवाल ने संसद की स्थायी समिति की 2025 की रिपोर्ट का हवाला देते हुए फार्मा कंपनियों की मनमानी पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि दवा कंपनियां 600 से 1100 प्रतिशत तक मुनाफा कमा रही हैं, जबकि कई जरूरी एंटीबायोटिक्स और जीवनरक्षक कैंसर दवाइयों की कीमत लाखों रुपये तक पहुंच चुकी है।

रेगुलेटरी फ्रेमवर्क की मांग

स्वाति मालीवाल ने पूछा कि क्या सरकार दवाओं की कीमतों पर लगाम लगाने के लिए कोई मजबूत नियामक ढांचा तैयार करेगी। इसके जवाब में स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि सरकार की ड्रग्स प्राइसिंग पॉलिसी पारदर्शी और निरंतर समीक्षा की प्रक्रिया पर आधारित है।

फार्मा कंपनियों पर गंभीर आरोप

अनुपूरक प्रश्न में यह भी खुलासा किया गया कि 2024 में हुए एक विशेष ऑडिट में सामने आया था कि एक फार्मा कंपनी ने करीब दो करोड़ रुपये खर्च कर 30 डॉक्टरों को पेरिस घुमाया। इस मुद्दे ने फार्मा सेक्टर की नैतिकता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

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