February 4, 2026

महाभारत के ‘युधिष्ठिर’ पहुंचे संत के दरबार, प्रेमानंद महाराज को सुनाया संवाद

महाभारत के ‘युधिष्ठिर’ पहुंचे संत के दरबार...

वृंदावन, 2 फरवरी : दूरदर्शन पर प्रसारित लोकप्रिय धारावाहिक महाभारत में युधिष्ठिर की भूमिका निभाने वाले प्रसिद्ध अभिनेता गजेंद्र चौहान सोमवार को वृंदावन पहुंचे। यहां उन्होंने परिक्रमा मार्ग स्थित श्री राधा केलीकुंज में संत प्रेमानंद महाराज के दर्शन किए और उनका आशीर्वाद प्राप्त किया।

संत प्रेमानंद महाराज ने की सराहना

गजेंद्र चौहान से मुलाकात के दौरान संत प्रेमानंद महाराज ने कहा,
“आपने हमारे धर्म के सार को दर्शाया है। युधिष्ठिर धर्म के सार से ही उत्पन्न हुए थे।”
संत ने अभिनेता के अभिनय और महाभारत में उनके योगदान की खुले दिल से सराहना की।

महाभारत का संवाद सुनाया

सोमवार सुबह करीब 7:30 बजे संत प्रेमानंद महाराज से आशीर्वाद लेने पहुंचे गजेंद्र चौहान ने उनसे महाभारत का एक संवाद सुनाने की अनुमति मांगी। अनुमति मिलने के बाद उन्होंने वह प्रसंग सुनाया, जब द्रौपदी वनवास जाने से इनकार कर देती हैं।

संवाद के दौरान युधिष्ठिर अपने भाइयों और माता को समझाते हैं कि भगवान श्रीराम जानते थे कि स्वर्ण मृग वास्तव में सोने का नहीं था, फिर भी वे उसके पीछे गए। सवाल यह उठता है कि क्या यह केवल लालच था, या इसके पीछे धर्म और कर्तव्य का गहरा संदेश छिपा था। इस प्रसंग को सुनकर उपस्थित श्रद्धालु भावुक हो गए।

अटल बिहारी वाजपेयी की पंक्ति भी सुनाई

इस अवसर पर गजेंद्र चौहान ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की एक प्रसिद्ध पंक्ति भी सुनाई—“कोई भी पुत्र हो, कोई भी पिता हो, कोई भी परिवार हो, कोई भी विरासत हो, कोई भी परंपरा हो — राष्ट्र से ऊपर कुछ नहीं हो सकता।” कार्यक्रम के अंत में संत प्रेमानंद महाराज ने गजेंद्र चौहान को श्रीजी का प्रसादी चोगा और प्रसाद भेंट किया तथा उन्हें आशीर्वाद दिया।