चंडीगढ़, 18 मार्च: पंजाब के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां ने पराली जलाने के मामलों में आई भारी कमी की केंद्र सरकार द्वारा पुष्टि का स्वागत करते हुए इसे राज्य के किसानों की बड़ी जीत बताया। उन्होंने कहा कि अब केंद्र सरकार को केवल आंकड़ों को स्वीकार करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि लंबित ग्रामीण विकास फंड (आरडीएफ) जारी कर राज्य के साथ न्याय करना चाहिए।
केंद्रीय पर्यावरण राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह द्वारा लोकसभा में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2022 के बाद पंजाब और हरियाणा में फसल अवशेष जलाने की घटनाओं में 90 प्रतिशत से अधिक की कमी आई है। खुड्डियां ने कहा कि यह वैज्ञानिक और सैटेलाइट डेटा उन आलोचकों के लिए जवाब है जो पंजाब के किसानों को लगातार दोषी ठहराते रहे।
किसानों को बदनाम करने वालों को जवाब
कृषि मंत्री ने कहा कि वर्षों से पंजाब के किसानों को दिल्ली की खराब वायु गुणवत्ता के लिए जिम्मेदार ठहराया जाता रहा, लेकिन अब केंद्र के आधिकारिक आंकड़ों ने इन दावों को खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि अब आलोचकों को अपने बयान वापस लेने चाहिए।
खुड्डियां ने केंद्र सरकार से 8800 करोड़ रुपये के लंबित ग्रामीण विकास फंड (आरडीएफ) को तुरंत जारी करने की मांग की। उन्होंने कहा कि यह राशि कई खरीद सीजनों से रोकी जा रही है, जबकि पंजाब के किसान देश का पेट भरने में अहम भूमिका निभाते हैं।
कृषि मशीनीकरण पर बड़ा निवेश
राज्य सरकार के प्रयासों का जिक्र करते हुए मंत्री ने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में फसल अवशेष प्रबंधन (सीआरएम) मशीनरी पर 416 करोड़ रुपये की सब्सिडी दी गई। वहीं, वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 600 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में राज्य सरकार पराली के वैज्ञानिक प्रबंधन के लिए दीर्घकालिक योजना पर काम कर रही है, ताकि किसानों को भविष्य में पराली जलाने की जरूरत ही न पड़े। कृषि मंत्री ने किसानों की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने आधुनिक मशीनरी अपनाकर यह साबित कर दिया है कि वे देश के सच्चे “अन्नदाता” हैं। उन्होंने कहा कि उचित सहयोग मिलने पर किसान असंभव को भी संभव बना सकते हैं।

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