नई दिल्ली, 8 जनवरी : पाकिस्तान पिछले कई सालों से जिन अल्पसंख्यक-विरोधी रणनीतियों को अपना रहा है, अब उन्हें बांग्लादेश में बड़े पैमाने पर लागू किया जा रहा है। पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई और जमात-ए-इस्लामी हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों को खत्म करना चाहते हैं ताकि बांग्लादेश एक पूर्ण इस्लामी राष्ट्र बन सके। हिंदुओं की हत्या करने वाले जबरन वसूली का रैकेट चलाकर पैसा कमाना चाहते हैं।
आईएसआई की बड़ी साजिश हर बांग्लादेशी को भारतीयों, हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों से नफरत करवाना है। उसे लगता है कि इन हत्याओं का असर भारत पर पड़ेगा और धार्मिक दंगे भड़केंगे। इन हत्याओं के जरिए वे भारत में हिंदुओं को भड़काना चाहते हैं ताकि दंगे दूर-दूर तक फैल जाएं।
भारत में दंगे भड़काने की कोशिश
एक खुफिया अधिकारी ने कहा कि इन हत्याओं को रोकना नामुमकिन है। इन चरमपंथियों को मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली सरकार का समर्थन प्राप्त है। जांच से पता चला है कि पुलिस इस मामले को सुलझाने में दिलचस्पी नहीं दिखा रही है। बल्कि, पुलिस मामलों को कमजोर कर रही है और गिरफ्तार किए गए लोगों को भी सजा नहीं दी जा रही है। प्रशासन जानता है कि अगर कड़ी सजा दी जाए तो इस तरह की लक्षित हत्याएं रुक सकती हैं।
पड़ोसी देशों को अस्थिर करने की पुरानी नीति
जिस तरह से मामलों की जांच हो रही है और हत्याएं हो रही हैं, उससे साफ है कि इसमें पाकिस्तान की गहरी संलिप्तता है। पाकिस्तान पड़ोसी देशों को अस्थिर करने के लिए धार्मिक पहचान को हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहा है। उसने जम्मू-कश्मीर, काबुल और अब बांग्लादेश में ऐसा किया है। इसके अलावा, आईएसआई यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहा है कि ढाका की रणनीतिक स्वतंत्रता कमजोर हो और देश हर समय असुरक्षित रहे। साथ ही, आईएसआई ने बांग्लादेश में हो रही सभी गलतियों के लिए नई दिल्ली को दोषी ठहराकर इसमें भारत का एंगल भी जोड़ दिया है।
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