कोलकाता, 8 जनवरी : प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि चुनावी रणनीतिकार संस्था आई-पैक (Indian PAC) के प्रमुख प्रतीक जैन के आवास पर छापेमारी के दौरान उन्होंने एक लैपटॉप, मोबाइल फोन और कई अहम दस्तावेज जबरन अपने साथ ले लिए। ईडी ने इस कथित कार्रवाई को जांच में बाधा और सबूत नष्ट करने का प्रयास बताते हुए कलकत्ता हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। इस मामले में शुक्रवार को सुनवाई होने की संभावना है।
ईडी का कहना है कि यह छापेमारी किसी राजनीतिक उद्देश्य से नहीं, बल्कि कोयला तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े एक बड़े मामले की जांच के तहत की गई थी। वहीं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इन छापों को पूरी तरह राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया है। गुरुवार को ईडी ने कोयला तस्करी और धन शोधन मामले में पश्चिम बंगाल और दिल्ली में कुल 10 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। हालांकि, यह कार्रवाई उस समय नाटकीय मोड़ पर पहुंच गई जब ईडी ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने मौके पर पहुंचकर जांच में हस्तक्षेप किया और महत्वपूर्ण सबूत अपने साथ ले गईं।
शुक्रवार को हो सकती है सुनवाई
ईडी के अनुसार, यह पूरा मामला नवंबर 2020 में दर्ज सीबीआई की एफआईआर (आरसी 0102020ए0022) और उसके बाद दर्ज ईडी की ईसीआईआर पर आधारित है। इस मामले में मुख्य आरोपी अनूप माझी और उसके सिंडिकेट पर ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ECL) के लीज क्षेत्रों से अवैध रूप से कोयला निकालकर बंगाल के विभिन्न जिलों में बेचने का आरोप है।
जांच एजेंसी का दावा है कि कोयला तस्करी से हुई करोड़ों रुपये की अवैध कमाई को हवाला नेटवर्क के जरिए मनी लॉन्ड्रिंग किया गया। जांच में यह भी सामने आया है कि इसी नेटवर्क के माध्यम से बड़ी रकम इंडियन पीएसी (आई-पैक) कंसल्टिंग प्राइवेट लिमिटेड तक पहुंची। इसी कड़ी को जोड़ने के लिए दिल्ली और कोलकाता में तलाशी अभियान चलाया गया।
अब इस पूरे घटनाक्रम पर सभी की नजरें कलकत्ता हाई कोर्ट की सुनवाई पर टिकी हैं, जहां ईडी और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के पक्ष अपनी-अपनी दलीलें पेश करेंगे।

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