January 10, 2026

पोषण और प्रारंभिक शिक्षा को मजबूत करने पर पंजाब सरकार का फोकस : डॉ. बलजीत कौर

पोषण और प्रारंभिक शिक्षा को मजबूत करने पर...

चंडीगढ़/मलोट, 9 जनवरी : पंजाब सरकार बच्चों के सर्वांगीण विकास को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा (ECCE) और समग्र पोषण योजना (पोषण अभियान) के तहत राज्य व जिला स्तर पर व्यापक क्षमता विकास और जागरूकता कार्यक्रम लागू कर रही है। इसका उद्देश्य बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण और सीखने के परिणामों को और बेहतर बनाना है।

जमीनी कर्मचारियों की क्षमता बढ़ाना लक्ष्य

इसी क्रम में मलोट में पोषण अभियान के अंतर्गत राज्य स्तरीय पोषण जागरूकता एवं क्षमता विकास कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम ‘पोषण भी, पढ़ाई भी’ टियर-2, फेज-2 प्रशिक्षण योजना के तहत हुआ, जिसमें सामाजिक सुरक्षा, महिला एवं बाल विकास मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने भाग लिया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य जमीनी स्तर पर कार्यरत कर्मचारियों की कार्यक्षमता बढ़ाना और पोषण व शिक्षा योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना रहा।

अब तक 5,000 आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की भर्ती

कैबिनेट मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने कहा कि पंजाब सरकार इस विभाग को विशेष प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने बताया कि अब तक 5,000 आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की भर्ती की जा चुकी है, जबकि आने वाले समय में 6,000 और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता व हेल्पर नियुक्त किए जाएंगे। मंत्री ने बताया कि 1,000 आंगनवाड़ी केंद्रों को आधुनिक स्वरूप में विकसित किया गया है और प्रत्येक केंद्र में आवश्यक बुनियादी सुविधाएँ उपलब्ध करवाई जा रही हैं।

डॉ. बलजीत कौर ने कहा कि माताओं और बच्चों का स्वास्थ्य, पोषण और प्रारंभिक शिक्षा पंजाब सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पोषण अभियान और ECCE आपस में गहराई से जुड़े हुए हैं, क्योंकि उचित पोषण के बिना बच्चों का समुचित विकास और सीखना संभव नहीं है।

राज्य स्तरीय प्रशिक्षण अभियान जारी

उन्होंने बताया कि पोषण अभियान एक बहु-विभागीय योजना है, जिसमें स्वास्थ्य, महिला एवं बाल विकास, शिक्षा, पेयजल और स्वच्छता विभागों की सक्रिय भूमिका है। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को उन्होंने इस योजना की रीढ़ बताया। सामाजिक सुरक्षा, महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा आंगनवाड़ी सुपरवाइजरों और कार्यकर्ताओं के लिए राज्य स्तरीय प्रशिक्षण अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत 3 से 6 वर्ष के बच्चों के लिए खेल-आधारित, बाल-केंद्रित और विकासात्मक शिक्षा प्रणाली लागू की जा रही है।

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