नई दिल्ली, 10 जनवरी : भारत में लगातार बढ़ रहे सड़क हादसों को रोकने के लिए केंद्र सरकार एक बड़ा और क्रांतिकारी कदम उठाने जा रही है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने जानकारी दी है कि सरकार जल्द ही व्हीकल-टू-व्हीकल (V2V) कम्युनिकेशन तकनीक पेश करेगी। इस तकनीक के लागू होने से वाहन आपस में वायरलेस तरीके से डेटा साझा कर सकेंगे, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका काफी हद तक कम हो जाएगी।
कैसे काम करेगी V2V तकनीक
इस नई प्रणाली के जरिए वाहन पहले ही अलर्ट हो जाएंगे कि आगे चल रही कार ने अचानक ब्रेक लगाया है या कोई वाहन ब्लाइंड स्पॉट में मौजूद है। यह सिस्टम 300 से 500 मीटर के दायरे में मौजूद अन्य वाहनों को चेतावनी भेजने और प्राप्त करने में सक्षम होगा।
इंटरनेट के बिना भी होगी कामयाब
V2V तकनीक की खास बात यह है कि यह इंटरनेट या मोबाइल नेटवर्क के बिना सीधे रेडियो स्पेक्ट्रम (5.875–5.905 GHz) या 5G की मदद से काम करेगी। इससे नेटवर्क न होने की स्थिति में भी सुरक्षा सुनिश्चित होगी। सरकार का लक्ष्य है कि 2026 के अंत तक इस तकनीक को पूरे देश में लागू कर दिया जाए। शुरुआत में यह सुविधा नई गाड़ियों में दी जाएगी, जबकि बाद में पुराने वाहनों में भी इसे फिट करने की योजना है।
घने कोहरे में भी हादसों से बचाव
यह तकनीक सर्दियों में पड़ने वाले घने कोहरे के दौरान होने वाले बड़े सड़क हादसों को रोकने में भी मददगार साबित होगी, क्योंकि ड्राइवर को कुछ दिखाई देने से पहले ही चेतावनी मिल जाएगी। नितिन गडकरी के अनुसार, भारत में हर साल करीब 5 लाख सड़क हादसे होते हैं, जिनमें लगभग 1.8 लाख लोगों की मौत हो जाती है। इनमें से 66 प्रतिशत मृतक 18 से 34 वर्ष आयु वर्ग के युवा होते हैं।
रोड सेफ्टी के लिए अन्य बड़े सुधार
सड़क सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार मोटर वाहन अधिनियम में 61 संशोधन, ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों के लिए प्वाइंट-बेस्ड सिस्टम और वाहनों में ADAS (एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम) जैसी आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा देने पर भी विचार कर रही है। सरकार का मानना है कि इन कदमों से आने वाले वर्षों में सड़क हादसों और मौतों की संख्या में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकेगी।

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