January 17, 2026

फोरेंसिक जांच में वीडियो से छेड़छाड़ नहीं पाई गई: स्पीकर

फोरेंसिक जांच में वीडियो से छेड़छाड़...

नई दिल्ली, 17 जनवरी : दिल्ली विधानसभा के स्पीकर विजेंद्र गुप्ता ने शनिवार को कहा कि नेता प्रतिपक्ष आतिशी से जुड़ी कथित वीडियो को लेकर फोरेंसिक साइंस लैबोरेटरी (FSL) की रिपोर्ट आ गई है। रिपोर्ट के अनुसार वीडियो क्लिप पूरी तरह असली है और उसमें किसी भी तरह की छेड़छाड़ नहीं की गई है। यह वीडियो सिख गुरुओं के कथित अपमान से जुड़ा बताया जा रहा है।

FSL रिपोर्ट में क्या कहा गया

स्पीकर विजेंद्र गुप्ता ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि यह वीडियो 8 जनवरी को आम आदमी पार्टी की मांग पर ही जांच के लिए भेजी गई थी। फोरेंसिक रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि वीडियो में की गई टिप्पणी उसके फ्रेम्स से मेल खाती है और क्लिप में किसी प्रकार की एडिटिंग या छेड़छाड़ के संकेत नहीं मिले हैं।

AAP ने रिपोर्ट को किया खारिज

दिल्ली ‘आप’ के अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने FSL रिपोर्ट को खारिज करते हुए कहा कि इसमें सबसे अहम सवाल का जवाब नहीं दिया गया है—कि क्या आतिशी ने वास्तव में “गुरु” शब्द का इस्तेमाल किया था। उनका दावा है कि आतिशी ने ऐसा कोई शब्द नहीं कहा और भाजपा इस वीडियो के जरिए धार्मिक अस्थिरता फैलाने की कोशिश कर रही है। इससे पहले ‘आप’ शासित पंजाब की पुलिस ने दावा किया था कि उनकी फोरेंसिक जांच में यह वीडियो ‘डॉक्टर्ड’ यानी छेड़छाड़ की हुई पाई गई थी। इसी आधार पर ‘आप’ के मुख्य व्हिप संजीव झा ने भाजपा नेता कपिल मिश्रा के खिलाफ विशेषाधिकार हनन की कार्रवाई की मांग की थी।

CBI जांच की मांग

स्पीकर गुप्ता ने आरोप लगाया कि पंजाब सरकार ने “जल्दबाजी में” अपनी जांच करवाई और एफआईआर दर्ज की। उन्होंने कहा कि अब वे इस पूरे मामले और पंजाब सरकार की फोरेंसिक रिपोर्ट की सीबीआई जांच की मांग करेंगे। विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि आतिशी को इस मामले में माफी मांगनी चाहिए, अन्यथा विधानसभा सख्त कदम उठाएगी। यह विवाद 6 जनवरी को दिल्ली विधानसभा में गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी दिवस पर हुई चर्चा के दौरान की गई कथित टिप्पणी से शुरू हुआ था।

राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज

जहां आतिशी ने भाजपा पर “घटिया राजनीति” करने का आरोप लगाया है, वहीं दिल्ली सरकार के मंत्री कपिल मिश्रा का कहना है कि FSL रिपोर्ट ने आतिशी के “गुनाह” को साबित कर दिया है। फोरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद भी यह मामला शांत होता नहीं दिख रहा। वीडियो की सत्यता, शब्दों की व्याख्या और अलग-अलग जांच रिपोर्टों के चलते दिल्ली की राजनीति में यह मुद्दा और गर्माने की संभावना है।

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