नई दिल्ली, 17 जनवरी : एक नई वैज्ञानिक शोध में खुलासा हुआ है कि पृथ्वी के मौसम को केवल सूरज ही नहीं, बल्कि मंगल ग्रह भी प्रभावित करता है। अध्ययन के अनुसार, मंगल ग्रह का गुरुत्वाकर्षण पृथ्वी के झुकाव और कक्षा (ऑर्बिट) पर असर डालता है, जिससे लाखों वर्षों तक चलने वाले जलवायु चक्र प्रभावित होते हैं।
‘स्पेस डॉट कॉम’ की रिपोर्ट के मुताबिक, भले ही मंगल ग्रह आकार में बृहस्पति जैसे विशाल ग्रहों से काफी छोटा है, लेकिन लंबे समय में यह पृथ्वी की जलवायु को आकार देने में अहम भूमिका निभाता है। इससे यह साफ होता है कि पृथ्वी के मौसम को बदलने में सूरज के साथ-साथ अन्य ग्रहों का भी योगदान है।
मिलानकोविच चक्रों की भूमिका
वैज्ञानिक लंबे समय से मानते आ रहे हैं कि पृथ्वी की जलवायु ‘मिलानकोविच चक्रों’ से प्रभावित होती है। ये चक्र पृथ्वी के झुकाव, घूर्णन और कक्षा में होने वाले धीमे बदलावों से जुड़े हैं, जो सौर मंडल के अन्य ग्रहों के गुरुत्वीय प्रभाव के कारण होते हैं। अब तक शुक्र और बृहस्पति को इन चक्रों का प्रमुख कारक माना जाता रहा है।
कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी, रिवरसाइड के प्रोफेसर स्टीफन केन ने ब्रिटेन की बर्मिंघम यूनिवर्सिटी और ऑस्ट्रेलिया की सदर्न क्वींसलैंड यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों के साथ मिलकर यह सिमुलेशन आधारित अध्ययन किया। पहले माना जाता था कि मंगल का पृथ्वी पर प्रभाव बेहद मामूली है, लेकिन इस शोध के नतीजों ने वैज्ञानिकों को चौंका दिया।
मंगल को हटाने पर बदल गया जलवायु चक्र
अध्ययन में जब सिमुलेशन से मंगल ग्रह को पूरी तरह हटाया गया, तो लगभग 1 लाख वर्ष और 24 लाख वर्ष की अवधि वाले दो अहम जलवायु चक्र पूरी तरह समाप्त हो गए। हालांकि लगभग 4.3 लाख वर्ष वाला प्रमुख चक्र शुक्र और बृहस्पति के प्रभाव से जारी रहा। शोध में यह भी सामने आया कि यदि मंगल ग्रह का द्रव्यमान (मास) बढ़ाया जाए, तो उसका प्रभाव और अधिक बढ़ सकता है और जलवायु चक्रों की अवधि छोटी हो सकती है। यह खोज पृथ्वी के भू-वैज्ञानिक और जलवायु इतिहास को समझने में एक नई दिशा देती है।
पृथ्वी का मौसम केवल सूरज पर निर्भर नहीं है, बल्कि सौर मंडल के अन्य ग्रह—विशेष रूप से मंगल—भी लंबे समय तक इसकी जलवायु को प्रभावित करते रहे हैं। यह शोध जलवायु विज्ञान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
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