मजीठा (अमृतसर), 19 जनवरी : पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) के प्रधान पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि यह पंथ के लिए बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि वे गुरु साहिबान के सिपाही बनने की बजाय सुखबीर सिंह बादल के सिपाही बने हुए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि धार्मिक संस्थाओं को किसी राजनीतिक परिवार की सेवा नहीं, बल्कि गुरु साहिब की सेवा करनी चाहिए।
23 ग्रामीण लिंक सड़कों का नींव पत्थर रखा।
मजीठा में राज्य स्तरीय समागम के दौरान मुख्यमंत्री ने 23 ग्रामीण लिंक सड़कों का नींव पत्थर रखा। इस मौके पर उन्होंने घोषणा की कि पंजाब में अब डर का दौर, ‘परची का दौर’ (जबरन वसूली) और अकालियों की धक्केशाही पूरी तरह खत्म हो चुकी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के लोगों ने डराने-धमकाने की राजनीति को नकारते हुए विकास, जवाबदेही और लोक कल्याण आधारित शासन मॉडल को अपनाया है।
अकालियों की वापसी का मतलब अंधकार युग
सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “पहले यह इलाका डर के साये में रहता था। खुद को ‘जरनैल’ कहने वाले लोग आम जनता पर झूठे केस थोपते थे। कांग्रेस और अकाली सरकारों की मिलीभगत से दहशत का माहौल बनाया गया था।” उन्होंने कहा कि अब यह डर खत्म हो चुका है क्योंकि लोगों का राज स्थापित हो गया है।
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर अकाली दल सत्ता में वापस आया तो इसका मतलब होगा श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की दोबारा बेअदबी, निर्दोष लोगों पर गोलीबारी और आम जनता पर जुल्म। उन्होंने कहा कि पंजाब के लोग ऐसे अंधकारमय दौर में दोबारा नहीं लौटेंगे।
लापता सरूपों की जांच पर सरकार का रुख
मुख्यमंत्री ने कहा कि मजीठा वही इलाका है, जहां 1919 में जलियांवाला बाग नरसंहार के बाद जनरल डायर को रात के खाने पर बुलाया गया था। उन्होंने इसे पंजाब के साथ विश्वासघात बताते हुए कहा कि ऐसे गुनाहों को पंजाब के लोग कभी नहीं भूलेंगे और न ही माफ करेंगे। भगवंत सिंह मान ने कहा कि अकालियों और एसजीपीसी की गलत नीतियों के कारण सरकार को श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के 328 लापता सरूपों की जांच के लिए विशेष जांच टीम (SIT) गठित करनी पड़ी।
उन्होंने स्पष्ट किया, “हमारा उद्देश्य केवल गुम हुए सरूपों का पता लगाना है। धार्मिक संस्थाओं में हस्तक्षेप करने का हमारा कोई इरादा नहीं है।”
एसजीपीसी पर सीधा हमला
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि एसजीपीसी के प्रधान अपनी मूल जिम्मेदारियों पर ध्यान देने की बजाय राजनीतिक रैलियों के प्रबंध में लगे हुए हैं।
उन्होंने कहा, “खुद को श्री गुरु गोबिंद सिंह जी का सिपाही कहने की बजाय वे गर्व से खुद को सुखबीर बादल का सिपाही बताते हैं। जिसने पंजाब को अपनी हरकतों से तबाह किया हो, उसकी सेवा पर गर्व करने वाले से पंथ की भलाई की उम्मीद कैसे की जा सकती है?” मुख्यमंत्री के इस बयान से पंजाब की राजनीति में एक बार फिर तीखी बहस छिड़ने के आसार हैं।
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