नई दिल्ली, 20 जनवरी : भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी से जुड़े बैंक धोखाधड़ी मामले में ब्रिटेन की एक अदालत ने भारत की दिल्ली हाईकोर्ट से सहायता मांगी है। इस मामले में बैंक ऑफ इंडिया के एक अधिकारी का बयान दर्ज किया जाना आवश्यक है, जिसके लिए ब्रिटिश अदालत ने औपचारिक रूप से दिल्ली हाईकोर्ट को पत्र लिखा है। दिल्ली हाईकोर्ट ने नीरव मोदी सहित सभी संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किए हैं। न्यायमूर्ति हरि शंकर ने कहा कि यह पहली बार है जब किसी विदेशी अदालत की अपील पर बिना सभी पक्षों से परामर्श किए कार्रवाई करने का प्रश्न सामने आया है।
केंद्र सरकार की भूमिका
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह प्रक्रिया केंद्र सरकार की सहायता के बिना संभव नहीं है। अदालत ने भारत सरकार से इस मामले में हस्तक्षेप करने का आग्रह किया है, ताकि कानूनी प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सके। नीरव मोदी से जुड़ा बैंक धोखाधड़ी का मामला इस समय एक ब्रिटिश बैंक में चल रहा है। इस केस में बैंक ऑफ इंडिया के एक अधिकारी की गवाही को अहम माना जा रहा है।
हेग कन्वेंशन का हवाला
दिल्ली हाईकोर्ट ने बताया कि केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्रालय ने यह पत्र 1970 के हेग कन्वेंशन के तहत अदालत को भेजा है। इस कन्वेंशन के अनुसार सिविल और वाणिज्यिक मामलों में विदेशों से साक्ष्य एकत्र करने की अनुमति दी जाती है। अब इस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट सभी पक्षों के जवाब का इंतजार कर रही है, जिसके बाद यह तय किया जाएगा कि ब्रिटिश अदालत की मांग पर आगे क्या कानूनी कदम उठाए जाएंगे।
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