नई दिल्ली, 23 जनवरी : पंजाब कांग्रेस में जारी अंदरूनी कलह को खत्म करने के लिए कांग्रेस हाईकमान ने कड़ा रुख अपनाया है। दिल्ली में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर पंजाब कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के साथ एक अहम बैठक हुई। इस बैठक में राहुल गांधी, केसी वेणुगोपाल के साथ पंजाब के दिग्गज नेता शामिल हुए। बैठक के दौरान हाईकमान ने दो टूक शब्दों में कहा कि पार्टी के भीतर गुटबाजी किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
सभी नेताओं को निर्देश दिया गया कि वे सार्वजनिक मंचों पर एक-दूसरे के खिलाफ बयानबाजी से पूरी तरह परहेज करें। लगभग तीन घंटे चली इस बैठक में पंजाब कांग्रेस के अंदरूनी विवाद पर गंभीर मंथन किया गया।
अनुशासनहीनता पर नहीं होगी कोई रियायत
पंजाब कांग्रेस के प्रभारी भूपेश बघेल ने बैठक के बाद कहा कि सभी नेताओं को साफ संदेश दे दिया गया है कि अनुशासनहीनता स्वीकार नहीं की जाएगी। यदि किसी नेता को कोई शिकायत या समस्या है तो वह सीधे हाईकमान के सामने रखे, लेकिन मीडिया या सार्वजनिक मंच पर बयान देना गलत है। उन्होंने यह भी दावा किया कि पंजाब में कांग्रेस पूर्ण बहुमत से जीत दर्ज करेगी और फिलहाल पार्टी के संगठनात्मक ढांचे में किसी तरह का बदलाव नहीं किया जाएगा।
विवाद की जड़ क्या है?
यह पूरा विवाद पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के एक बयान के बाद गहराया था। चन्नी ने एक बैठक में सवाल उठाया था कि जब पंजाब में दलित आबादी 35–38 प्रतिशत है, तो पार्टी के सभी अहम पद (प्रदेश अध्यक्ष, सीएलपी नेता, महिला विंग प्रमुख) कथित तौर पर उच्च जाति के नेताओं के पास क्यों हैं।
हालांकि चन्नी ने पहले इस बयान से इनकार किया था, लेकिन बाद में वीडियो सामने आने के बाद पार्टी के भीतर खींचतान बढ़ गई।
कौन-कौन रहा बैठक में शामिल
इस अहम बैठक में कांग्रेस राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, वरिष्ठ नेता राहुल गांधी, सांसद केसी वेणुगोपाल और पंजाब मामलों के प्रभारी भूपेश बघेल मौजूद रहे। पंजाब इकाई की ओर से नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा, प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग, पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, सुखजिंदर सिंह रंधावा सहित कई अन्य वरिष्ठ नेता शामिल हुए। हाईकमान के इस सख्त रुख के बाद अब नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या पंजाब कांग्रेस के नेता आने वाले दिनों में मतभेद भुलाकर एकजुट होकर आगे बढ़ते हैं या नहीं।
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