नई दिल्ली, 28 जनवरी : नकली और घटिया बीजों के अवैध कारोबार के खिलाफ अब निर्णायक कार्रवाई की तैयारी है। वर्षों से किसानों के भरोसे का शोषण कर रहे इस नेटवर्क पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार बजट सत्र में लगभग सात दशक पुराने बीज अधिनियम को बदलकर एक नया, सख्त और आधुनिक कानून लाने जा रही है। नया कानून गुणवत्ता, जवाबदेही और पारदर्शिता को प्राथमिकता देगा।
बिना पंजीकरण बीज बिक्री पर रोक
प्रस्तावित कानून के तहत अब कोई भी बीज कंपनी, उत्पादक या विक्रेता बिना पंजीकरण के बीज नहीं बेच सकेगा। जानबूझकर घटिया या नकली बीज बेचने वालों को तीन साल तक की जेल और 30 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है। बिल को विधायी परामर्श के लिए पेश कर दिया गया है और किसान संगठनों व अन्य हितधारकों से सुझाव मांगे गए हैं।
पुराने कानून की कमजोरियां होंगी दूर
मौजूदा बीज अधिनियम 1966 में लागू हुआ था, जब न तो डिजिटल निगरानी व्यवस्था थी और न ही बाजार इतना जटिल था। उस समय अपराधियों के लिए अधिकतम जुर्माना मात्र 500 रुपये था, जिसके चलते नकली बीज जैसे गंभीर अपराध भी मामूली दंड में निपट जाते थे। नए कानून का उद्देश्य इसी कमजोरी को दूर करना है।
बीजों के लिए ट्रेसेबिलिटी सिस्टम
नए बीज बिल की सबसे बड़ी खासियत ट्रेसेबिलिटी सिस्टम होगी। बाजार में बिकने वाले हर बीज का डिजिटल रिकॉर्ड रखा जाएगा। बीज पैकेट पर क्यूआर कोड होगा, जिसे स्कैन करने पर यह जानकारी मिलेगी कि बीज कहां पैदा हुआ, किस यूनिट में प्रोसेस हुआ और किस विक्रेता के जरिए किसान तक पहुंचा। इससे नकली और खराब बीज लंबे समय तक बाजार में नहीं टिक पाएंगे और दोषियों की तुरंत पहचान हो सकेगी।
पूरी सप्लाई चेन होगी जवाबदेह
नए कानून के तहत बीज कंपनियों, प्रोसेसिंग यूनिट्स, डीलरों और पौध नर्सरियों का पंजीकरण अनिवार्य किया जाएगा। इससे धोखाधड़ी करने वाली कंपनियों पर रोक लगेगी और किसानों को यह भरोसा मिलेगा कि वे प्रमाणित और विश्वसनीय स्रोतों से बीज खरीद रहे हैं।
किसानों के पारंपरिक अधिकार सुरक्षित
कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने स्पष्ट किया है कि यह कानून किसानों की पारंपरिक बीज प्रणालियों में दखल नहीं देगा। किसान अपने बीज स्वयं बो सकेंगे, उनका आदान-प्रदान कर सकेंगे और गांवों में चली आ रही बीज विनिमय की परंपरा भी सुरक्षित रहेगी। कार्रवाई केवल उन लोगों के खिलाफ होगी जो नकली और घटिया बीजों का व्यावसायिक स्तर पर कारोबार करते हैं।
प्रस्तावित बीज बिल में सख्त सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान कर यह साफ संदेश दिया गया है कि किसानों को नुकसान पहुंचाना अब कम जोखिम वाला अपराध नहीं रहेगा। सरकार का मानना है कि यह कानून किसानों की आजीविका और देश की खाद्य सुरक्षा दोनों को मजबूत करेगा।
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