February 4, 2026

एस.वाई.एल पर बदले सुर, मिले ताल: पंजाब-हरियाणा अब ‘भाई-भाई’

एस.वाई.एल पर बदले सुर, मिले ताल...


चंडीगढ़, 28 जनवरी : सतलुज-यमुना लिंक (एसवाईएल) नहर मामले पर आज यहां हुई छठे दौर की बैठक में पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के बदले हुए तेवर साफ नजर आए। एक-दूसरे के खिलाफ सियासी तीर चलाने वाले दोनों मुख्यमंत्रियों के सुर आज न सिर्फ मिले, बल्कि ताल भी पूरी तरह से एक जैसी दिखी।

बैठक बेहद सौहार्दपूर्ण वातावरण में हुई। बैठक से पहले दोनों मुख्यमंत्रियों ने साथ में नाश्ता किया और पहली बार संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस भी की। बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने एक-दूसरे को स्मृति चिह्न भेंट किए और अपने-अपने अधिकारियों का परिचय कराया।

पहले के रुख से बिल्कुल अलग नजर आए मुख्यमंत्री

अब तक हुई पांच बैठकों में दोनों मुख्यमंत्री अपने-अपने राज्यों के हितों को आक्रामक ढंग से रखते रहे थे। “पानी की एक बूंद न देने”, “नहर निर्माण” और “यमुना के पानी में हिस्सा” जैसे मुद्दे तीखे अंदाज में उठते रहे थे। लेकिन आज बदला हुआ माहौल देखकर अधिकारी भी हैरान नजर आए। आज की बैठक में दोनों मुख्यमंत्रियों ने बार-बार इस बात पर जोर दिया कि पंजाब और हरियाणा का आपसी माहौल खराब नहीं होना चाहिए।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पंजाब विधानसभा चुनाव ज्यादा दूर नहीं हैं। भाजपा पूरी तैयारी के साथ चुनाव मैदान में उतरने जा रही है और मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी पंजाब में लगातार दौरे कर रहे हैं।

चुनावी सियासत की छाया

विशेषज्ञों के अनुसार एसवाईएल एक भावनात्मक मुद्दा है और भाजपा की केंद्रीय नेतृत्व पंजाब चुनावों से पहले इसे और गर्म नहीं करना चाहती। यही वजह है कि भाजपा फिलहाल पानी के मुद्दे पर पंजाब के किसानों को नाराज नहीं करना चाहती। इसी क्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने फरीदाबाद में हुई उत्तरी क्षेत्रीय परिषद की बैठक में जल से जुड़े मुद्दों को टाल दिया था।

गुरबाणी और भाईचारे का संदेश

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने गुरु नानक देव जी की बाणी का हवाला देते हुए कहा कि गुरुओं की शिक्षाएं उन्हें मार्गदर्शन देती हैं और बैठक सुखद माहौल में हुई। वहीं मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा, “हम भाई घनैया जी के वारिस हैं। हरियाणा हमारा दुश्मन नहीं, बल्कि भाई है। 1966 में हरियाणा अलग जरूर हुआ, लेकिन वह हमारा छोटा भाई है।”
प्रेस कॉन्फ्रेंस के अंत में मान ने स्पष्ट किया कि आज कोई “ब्रेकिंग” नहीं दी जाएगी।

सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में मामला

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि एसवाईएल नहर का मामला फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में लंबित है और अदालत ने दोनों राज्यों को आपसी बातचीत के जरिए समाधान निकालने के निर्देश दे रखे हैं। ऐसे में बदला हुआ यह सौहार्दपूर्ण रुख आने वाले समय में किसी बीच के रास्ते की ओर संकेत कर रहा है।

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