चंडीगढ़, 3 फरवरी : पंजाब सरकार को हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। राज्य की 9 नगर निगमों और 100 से अधिक नगर काउंसिलों के चुनावों के लिए नोटिफिकेशन जारी करने पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है। अदालत ने साफ कहा है कि जब तक सरकार वार्डबंदी को चुनौती देने वाली याचिकाओं का जवाब दाखिल नहीं करती, तब तक चुनाव प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकती।
सरकार की लापरवाही पर अदालत सख्त
हाईकोर्ट को बताया गया कि वार्डबंदी के खिलाफ दर्ज दर्जनों याचिकाओं में पहले ही नोटिस जारी किए जा चुके हैं, लेकिन पंजाब सरकार के मुख्य सचिव की ओर से अब तक कोई जवाब दाखिल नहीं किया गया। इस लापरवाही को गंभीर मानते हुए अदालत ने स्पष्ट कहा कि “जब तक जवाब दाखिल नहीं होता, चुनाव अधिसूचना जारी नहीं की जाएगी।” अदालत ने इसे न्यायिक प्रक्रिया का उल्लंघन बताते हुए सरकार को कड़ी फटकार भी लगाई।
वार्डबंदी पर गंभीर आरोप
याचिकाकर्ताओं ने नई वार्डबंदी में गंभीर खामियों का आरोप लगाया है। इनमें मनमानी, राजनीतिक पक्षपात और जनसंख्या असंतुलन जैसे आरोप शामिल हैं। इसी कारण हाईकोर्ट में एक के बाद एक याचिकाएं दाखिल की जा रही हैं, जिनकी संख्या अब दर्जनों तक पहुंच चुकी है। जिन 9 नगर निगमों की वार्डबंदी को सीधे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है, उनमें बटाला, पठानकोट, कपूरथला, होशियारपुर, मोहाली, बठिंडा, अबोहर, मोगा, बरनाला शामिल हैं। अदालत ने इन सभी नगर निगमों के लिए 18 फरवरी तक चुनाव नोटिफिकेशन पर रोक लगा दी है।
100 से अधिक नगर काउंसिलें भी प्रभावित
हाईकोर्ट का यह आदेश केवल 9 नगर निगमों तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रदेश भर की 100 से अधिक नगर काउंसिलों को भी कवर करता है। इसका सीधा असर पूरे पंजाब की शहरी निकाय चुनाव प्रक्रिया पर पड़ा है।
अदालत के इस फैसले से शहरी संस्थाओं के चुनाव कराने की पंजाब सरकार की समय-सीमा खतरे में पड़ गई है। प्रशासनिक तैयारियां लगभग पूरी होने के बावजूद, अदालत की अनुमति के बिना अब कोई भी कदम नहीं उठाया जा सकता।
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