जालंधर, 19 फरवरी : ज्ञानी रघबीर सिंह, जो अकाल तख्त के पूर्व जत्थेदार और हरिमंदर साहिब के मुख्य ग्रंथी रह चुके हैं, ने आज सरबत खालसा बुलाने का आह्वान करते हुए शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) और बादल परिवार पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने कहा कि उनके इन आरोपों के चलते उन्हें पद से हटाया भी जा सकता है। उन्होंने कहा, “मैं स्वयं शिरोमणि कमेटी का कर्मचारी हूं, लेकिन मैं उस पद पर बैठा हूं जो कभी बाबा बुੱਢा जी के पास था। इसलिए पवित्र सिख संस्था के अंदर हो रहे कुप्रबंधन से संगत को अवगत कराना मेरी जिम्मेदारी है।”
“एक परिवार के हाथों में प्रबंधन”
ज्ञानी रघबीर सिंह ने आरोप लगाया कि सिख पंथ के मामलों का प्रबंधन कई वर्षों से एक ही परिवार के नियंत्रण में है और कमेटी के भीतर भ्रष्टाचार फैला हुआ है। उन्होंने कहा कि कमेटी की संपत्तियां गलत तरीके से बेची जा रही हैं, यहां तक कि सूखी लंगर की रोटियां भी बेची जा रही हैं। दुकानों को अधिक कीमत पर किराए पर दिया जा रहा है।
उन्होंने दावा किया कि जहां अखंड पाठ की निर्धारित फीस 8,500 रुपये है, वहीं विशेष स्थानों पर इसे कराने के लिए 5 लाख रुपये तक रिश्वत ली जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस कथित गिरोह में शामिल कर्मचारियों को पर्दाफाश के बाद भी बेहतर पद दिए गए।
328 सरूपों के गायब होने पर जवाबदेही की मांग
ज्ञानी रघबीर सिंह ने गुरु ग्रंथ साहिब के 328 लापता सरूपों का मुद्दा उठाते हुए एसजीपीसी से स्पष्ट जवाब और जवाबदेही की मांग की। उन्होंने यह भी कहा कि उन पर 2 दिसंबर के हुक्मनामे को लेकर बयान देने के लिए दबाव डाला गया था कि वह भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के निर्देश पर जारी हुआ था, लेकिन उन्होंने झूठ बोलने से इनकार कर दिया। गौरतलब है कि उन्हें मार्च 2025 में अकाल तख्त के जत्थेदार पद से हटा दिया गया था।
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