चंडीगढ़, 12 मार्च : पंजाब के जल संसाधन एवं खनन मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने विधानसभा में बजट बहस के दौरान कहा कि माइनिंग सुधारों और पोटाश खनिज की संभावित खोज से पंजाब को 20,000 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व मिल सकता है। उन्होंने कहा कि यह अनुमान अरविंद केजरीवाल द्वारा पहले दिए गए बयान पर आधारित है, जिसमें पंजाब में पोटाश भंडारों की संभावनाओं का उल्लेख किया गया था।
बिना नया टैक्स लगाए पेश किया गया बजट
मंत्री ने कहा कि वर्ष 2022 से 30,000 करोड़ रुपये का वार्षिक जीएसटी मुआवजा बंद होने के बावजूद सरकार ने जनता पर कोई नया टैक्स लगाए बिना बजट पेश किया है। उन्होंने इसके लिए वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा की सराहना की और कहा कि बजट में समाज के हर वर्ग के कल्याण के लिए कई अहम योजनाएं शामिल की गई हैं।
गोयल ने बताया कि पोटाश एक महत्वपूर्ण खनिज है, जिसका उपयोग उर्वरक बनाने में होता है और वर्तमान में देश इसे आयात करता है। उन्होंने कहा कि पहले के सर्वेक्षणों में पंजाब के कुछ क्षेत्रों में पोटाश के संकेत मिले थे, लेकिन पिछली सरकारों ने इस पर गंभीरता से काम नहीं किया। अब राज्य सरकार के प्रयासों से फाजिल्का जिले के गांव कबरवाला में लगभग 48 किलोमीटर क्षेत्र में 19.3 करोड़ रुपये की लागत से खोज कार्य शुरू किया गया है। प्रारंभिक ड्रिलिंग में अच्छी गुणवत्ता वाला पोटाश मिलने के संकेत मिले हैं।
खनन से राज्य को मिल सकती है बड़ी रॉयल्टी
मंत्री ने कहा कि खनिज की खोज और नीलामी का अधिकार केंद्र सरकार के पास होता है, जबकि उससे मिलने वाली रॉयल्टी राज्य को मिलती है। उन्होंने विश्वास जताया कि खनन शुरू होने के बाद पंजाब को रॉयल्टी के रूप में 20,000 करोड़ रुपये से अधिक की आय हो सकती है और इससे उर्वरकों के आयात पर देश की निर्भरता भी कम होगी।
अवैध माइनिंग के आरोपों को बताया राजनीतिक
खनन विभाग से जुड़े सवालों पर गोयल ने कहा कि अवैध माइनिंग के आरोप अक्सर राजनीतिक प्रेरणा से लगाए जाते हैं और कई बार नदियों से गाद निकालने और अवैध खनन के बीच अंतर को समझे बिना आरोप लगाए जाते हैं। उन्होंने कहा कि नदियों की सफाई और गाद निकालने का काम बाढ़ रोकने और नदियों के पुनर्जीवन के लिए जरूरी है।
अवैध खनन पर सख्त कार्रवाई
उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने अवैध माइनिंग के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए अब तक 1573 एफआईआर दर्ज की हैं और 1655 चालान पेश किए गए हैं। साथ ही जनहित में लुधियाना-रोपड़ नेशनल हाईवे परियोजना के लिए मिट्टी 3 रुपये प्रति घन फुट की दर से उपलब्ध करवाई जा रही है, जबकि बाजार में इसकी कीमत 6 रुपये प्रति घन फुट है।
गोयल ने बताया कि केंद्र सरकार के स्टेट माइनिंग रेडीनेस इंडेक्स में पंजाब ने नीलामी प्रदर्शन, माइनिंग संचालन और सतत माइनिंग सुधार की तीनों श्रेणियों में पहला स्थान हासिल किया है। इसके लिए राज्य को 200 करोड़ रुपये का पुरस्कार भी मिला है।
सिंचाई सुधारों पर सरकार का फोकस
गोयल ने बताया कि 2022 में सत्ता संभालने के बाद सरकार ने भूजल पर निर्भरता कम करने के लिए नहरों के पानी की आपूर्ति बढ़ाने पर काम किया है। पहले पंजाब अपने हिस्से के पानी का केवल 24 प्रतिशत उपयोग करता था, जिसे बढ़ाकर अब लगभग 78 प्रतिशत कर दिया गया है।
मंत्री ने बताया कि पिछली सरकार के तीन वर्षों में 2046 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे, जबकि मौजूदा सरकार ने नहर सिंचाई नेटवर्क को मजबूत करने के लिए लगभग 6500 करोड़ रुपये का निवेश किया है। फिरोजपुर फीडर और सरहिंद नहर की क्षमता बढ़ाने से करीब 9.35 लाख एकड़ भूमि की सिंचाई संभव होगी, जिससे किसानों को भरोसेमंद पानी की आपूर्ति मिलेगी।
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