नई दिल्ली, 2 अप्रैल : सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) के तहत कार्यरत सात न्यायिक अधिकारियों को ”बंधक” बनाए जाने की गंभीर घटना का संज्ञान लेते हुए इसे निंदनीय करार दिया है। न्यायालय ने इस मामले में राज्य के गृह सचिव, पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) और अन्य संबंधित अधिकारियों से ”निष्क्रियता” के लिए स्पष्टीकरण मांगा है।
CBI या NIA जांच की दी अनुमति
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ ने इस घटना की गंभीरता को देखते हुए निर्वाचन आयोग को निर्देश दिया कि इसकी जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) या राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) द्वारा कराई जाए।
पीठ ने स्पष्ट किया कि यह घटना न्यायिक अधिकारियों के मनोबल को तोड़ने और चुनावी प्रक्रिया को बाधित करने के लिए एक सोची-समझी और स्वार्थी कार्रवाई प्रतीत होती है। न्यायालय ने इस बात पर जोर दिया कि ऐसे कृत्य न केवल न्यायपालिका की स्वतंत्रता को प्रभावित करते हैं, बल्कि लोकतंत्र की नींव को भी कमजोर करते हैं। इस प्रकार की घटनाएं समाज में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर गंभीर प्रश्न उठाती हैं और यह आवश्यक है कि जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए।
कानून-व्यवस्था पर उठाए सवाल
प्रधान न्यायाधीश ने राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर चिंता व्यक्त की और कहा कि इसे सुधारने की आवश्यकता है। उन्होंने यह भी कहा कि न्यायपालिका की सुरक्षा और स्वतंत्रता सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। इस मामले में त्वरित और प्रभावी कार्रवाई की आवश्यकता है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके और न्यायिक अधिकारियों को अपने कार्यों को निष्पक्षता से करने का माहौल मिल सके।
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