नई दिल्ली, 2 अप्रैल : आम आदमी पार्टी और राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा के बीच पिछले कुछ समय से मतभेद की खबरें सामने आ रही थीं। गुरुवार को पार्टी के एक बड़े फैसले ने इन अटकलों पर मुहर लगा दी, जब राघव चड्ढा को राज्यसभा में डिप्टी लीडर के पद से हटा दिया गया।
दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में कई महीनों से इसकी चर्चा थी, लेकिन न तो राघव चड्ढा और न ही पार्टी की ओर से इस पर कोई आधिकारिक बयान आया था। हालांकि, लगातार मिल रहे संकेत बताते हैं कि दोनों के बीच सब कुछ ठीक नहीं चल रहा था।
केजरीवाल की खुशी में शामिल नहीं हुए
पार्टी और राघव चड्ढा के बीच दरार पहली बार तब सार्वजनिक रूप से नजर आई, जब अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया समेत कई नेताओं को दिल्ली शराब घोटाले मामले में राहत मिली।
फरवरी के अंत में निचली अदालत द्वारा इस मामले में राहत दिए जाने को केजरीवाल के लिए बड़ी जीत माना गया। जब पूरी पार्टी इस फैसले का जश्न मना रही थी, तब राघव चड्ढा न तो किसी समारोह में शामिल हुए और न ही उन्होंने सोशल मीडिया पर कोई प्रतिक्रिया दी।
सोशल मीडिया पर भी दिखी दूरी
राघव चड्ढा, जिन्हें कभी केजरीवाल का करीबी रणनीतिकार माना जाता था, उनके सोशल मीडिया व्यवहार से भी दूरी साफ नजर आने लगी। उनकी पोस्ट और वीडियो में न तो पार्टी का नाम दिख रहा था और न ही उसका झंडा या चिन्ह।
सूत्रों के अनुसार, पार्टी इस बात से भी असहज थी कि राघव चड्ढा राज्यसभा में ऐसे मुद्दे उठा रहे थे जो पार्टी की आधिकारिक लाइन से अलग थे और अधिकतर व्यक्तिगत नजर आते थे। इससे यह संदेश गया कि वह पार्टी की नीति से हट रहे हैं।
दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान भी राघव चड्ढा की सक्रियता कम देखी गई। वह कुछ रैलियों में जरूर नजर आए, लेकिन उसके बाद वह राष्ट्रीय मुद्दों पर ज्यादा ध्यान देने लगे।
भाजपा के करीब होने के संकेत
हाल के समय में कई ऐसे मौके आए जब उन्होंने संसद में मुद्दे उठाए और सरकार ने उन पर तुरंत कार्रवाई की। इन फैसलों पर राघव चड्ढा की सकारात्मक प्रतिक्रिया ने पार्टी के अंदर यह संदेश दिया कि वह भारतीय जनता पार्टी के करीब हो रहे हैं।
इन्हीं कारणों से आम आदमी पार्टी और राघव चड्ढा के बीच दूरी लगातार बढ़ती गई, जो अब बड़े संगठनात्मक फैसलों के रूप में सामने आ रही है।

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