इस्लामाबाद, 3 अगस्त : पाकिस्तान ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम के प्रति अपना समर्थन जाहिर किया है, जो कि ईरान के लिए एक महत्वपूर्ण राजनीतिक संकेत है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन के साथ एक बैठक के बाद यह स्पष्ट किया कि वह शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए ईरान की परमाणु क्षमता विकसित करने के अधिकार का समर्थन करते हैं।
पेजेश्कियन पाकिस्तान के दो दिवसीय दौरे पर आए थे, जिसके दौरान उन्होंने पाकिस्तान के विदेश मंत्री, प्रधानमंत्री और अन्य नेताओं के साथ कई महत्वपूर्ण बातचीत कीं।
अमेरिका और इजराइल ने हमेशा किया है विरोध
ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर पाकिस्तान का समर्थन इस समय विशेष महत्व रखता है, क्योंकि इस कार्यक्रम को लेकर इजरायल और अमेरिका ने लगातार चिंता व्यक्त की है। जून में, इजरायल और अमेरिका ने ईरान के परमाणु ठिकानों पर बमबारी की थी, जिसके परिणामस्वरूप इजरायल और ईरान के बीच 12 दिनों तक भीषण युद्ध हुआ।
ऐसे में, पाकिस्तान का ईरान के प्रति समर्थन न केवल क्षेत्रीय स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह ईरान के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक मजबूत राजनीतिक आधार भी प्रदान करता है।
ईरान पर हमलों की पाक कर चुका है निंदा
डॉन के मुताबिक, शहबाज शरीफ और मसूद पेजेश्कियन ने रविवार को कई समझौते किए हैं। दोनों देशों ने 10 अरब डॉलर के व्यापार लक्ष्य की क्षमता को साकार करने के लिए दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए। पेजेश्कियन के साथ संयुक्त प्रेस वार्ता में शहबाज शरीफ ने 13 जून को इजरायल के ईरान के परमाणु स्थलों पर किए गए हमले की निंदा की।
शहबाज शरीफ ने कहा कि इजरायल ने बिना किसी कारण और उकसावे के ईरान पर आक्रमण किया। इस हमले की ना केवल सरकार बल्कि पूरे 24 करोड़ पाकिस्तानी लोगों ने निंदा की क्योंकि इजरायल के पास इस हमले के लिए कोई तर्क नहीं था। शरीफ ने इजरायली हमलों में मारे गए ईरानी जनरलों, वैज्ञानिकों और नागरिकों के लिए भी संवेदना व्यक्त की।
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