पटियाला, 21 सितंबर : धान की कटाई के बाद राज्य में पराली जलाने का चलन शुरू होते ही प्रशासन भी हरकत में आ गया। इस बार सुप्रीम कोर्ट के सख्त निर्देशों के बाद सरकार और पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड पीपीसीबी ने सीजन की शुरुआत से ही कार्रवाई की। नतीजतन, अब तक पराली जलाने के 47 मामले सामने आ चुके हैं। पीपीसीबी के ताजा आंकड़ों के अनुसार, पराली जलाने के मामलों में अमृतसर जिला सबसे ऊपर है।
50 हजार रुपए किया जुर्माना
यहां अब तक पराली जलाने के 32 मामले सामने आए हैं, जिनके खिलाफ कार्रवाई की गई है, जिसके परिणामस्वरूप 50,000 रुपये का जुर्माना और 15,000 रुपये की वसूली हुई है। रिपोर्टों के अनुसार, पटियाला से पराली जलाने के छह मामले, तरनतारन से पांच और बठिंडा, फिरोजपुर, होशियारपुर और संगरूर से एक-एक मामले सामने आए हैं। शनिवार तक किसी भी किसान के खिलाफ एफआईआर या रेड एंट्री की कार्रवाई नहीं की गई है।
इसके अलावा, पराली को आग लगाने वालों पर 50,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया है। इसमें से अमृतसर में 40,000 रुपये, पटियाला और तरनतारन में 5,000-5,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया है। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में पंजाब सरकार को पराली जलाने पर रोक लगाने के सख्त आदेश जारी किए हैं। कोर्ट ने साफ कहा है कि अब किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
50 हजार रुपए किया जुर्माना
इसके बाद प्रशासन ने निगरानी बढ़ा दी है। खेतों की निगरानी के लिए सैटेलाइट रिपोर्ट और गांव स्तर की टीमों को सक्रिय कर दिया गया है। प्रशासन का कहना है कि पराली जलाने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। जुर्माने के साथ-साथ कानूनी कार्रवाई भी की जानी है। जिला स्तर के अधिकारियों को सीजन की शुरुआत में पराली जलाने से रोकने के लिए सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं।
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