चंडीगढ़, 18 फरवरी : पंजाब सरकार मार्च के पहले सप्ताह में बजट सत्र बुलाने की तैयारी में है। यह मौजूदा सरकार का आखिरी बजट सत्र होगा। पिछले वर्ष ‘आप’ सरकार का चौथा बजट सत्र 21 से 28 मार्च तक चला था और 26 मार्च को बजट पेश किया गया था। अधिकारिक सूत्रों के अनुसार इस बार 6 मार्च के आसपास सत्र बुलाए जाने की संभावना है। हालांकि अंतिम फैसला पंजाब कैबिनेट द्वारा लिया जाना अभी बाकी है।
चुनावी असर वाला बजट
मौजूदा सरकार का यह अंतिम बजट होने के कारण इस पर चुनावों की छाया भी देखने को मिलेगी। वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में सरकार हर वर्ग को साधने की कोशिश करेगी।सबसे अहम घोषणा मुख्यमंत्री भगवंत मान द्वारा महिलाओं को प्रति माह 1000 रुपये मान-भत्ता देने की योजना मानी जा रही है। प्रारंभिक अनुमान के अनुसार 18 वर्ष से अधिक आयु की महिलाओं को यह लाभ दिया जा सकता है।
इसके लिए प्रतिमाह लगभग 1000 से 1300 करोड़ रुपये की आवश्यकता होगी। सूत्रों के मुताबिक सरकारी जमीनों और संपत्तियों की नीलामी से करीब 4000 करोड़ रुपये जुटाए गए हैं, जिन्हें इस योजना में इस्तेमाल किया जा सकता है।
कर्ज और वित्तीय संतुलन
वित्तीय वर्ष की पहली तीन तिमाहियों में राज्य सरकार ने कर्ज लेने में संयम बरता है। अब तक 18,268.91 करोड़ रुपये का कर्ज लिया जा चुका है, जबकि मार्च तक 12 हजार करोड़ रुपये और कर्ज लेने की गुंजाइश है।
आगामी बजट में कर्मचारी वर्ग की नाराजगी दूर करने पर भी फोकस रहेगा। सरकार लाखों कर्मचारियों और पेंशनरों को महंगाई भत्ता (डीए) देने के लिए प्रावधान कर सकती है। फिलहाल पेंशनरों की डीए की पांच किस्तें लंबित हैं। संभावना है कि बजट से पहले एक या दो किस्तें जारी कर दी जाएं और शेष का प्रावधान बजट 2026-27 में किया जाए।
16वें वित्त आयोग से चुनौती
राज्य सरकार के सामने सबसे बड़ी चिंता वित्त आयोग की 16वीं सिफारिशों के तहत राजस्व घाटा अनुदान वापस लिए जाने को लेकर है। इससे अगले पांच वर्षों में राज्य को करीब 27 हजार करोड़ रुपये का नुकसान होने का अनुमान है। राज्य सरकार के पास आय के स्रोत सीमित हैं और चुनावी वर्ष में नया कर बोझ डालना या किसी तरह की कटौती करना भी राजनीतिक रूप से जोखिम भरा माना जा रहा है।
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